Tuesday, September 21, 2021
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कांग्रेस ने क्यों नख-दंतविहीन बनाया मनमोहन को?

देश मंथन डेस्क :

लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया के बीच में लगातार नये खुलासे हो रहे हैं और इस कडी में ताजा विस्फोट किया है प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के पूर्व मीडिया सलाहकार संजय बारू ने।

‘कम बोला, काम बोला’, पर ये कौन बोला?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ संपादक (राजनीतिक), एनडीटीवी :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ ने इन दिनों तहलका मचा रखा है। बारू ने प्रधानमंत्री कार्यालय में अपने संस्मरणों का जिक्र इस किताब में किया है।

पटरी से उतरता कांग्रेस का अभियान?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ संपादक (राजनीतिक), एनडीटीवी :

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ही खींची लक्ष्मण रेखा शुक्रवार को पार कर ली। जम्मू के डोडा में एक चुनावी सभा में उन्होंने एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर पहली बार व्यक्तिगत हमला किया।

बस औपचारिकता निभाने के लिए जारी कांग्रेसी घोषणा-पत्र

राजीव रंजन झा :

कल कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए अपना घोषणा-पत्र पेश किया, जिसके बारे में ज्यादातर टिप्पणियाँ अनुत्साही ही मिलीं।

जंग नहीं जनतंत्र है

अनिल सौमित्र, स्वतंत्र पत्रकार :

16वीं लोकसभा के गठन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यह न युद्ध है और ना ही किसी पार्टी के लिए अंतिम है।

‘कम बोला, काम बोला’ वाक़ई?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार :

कांग्रेस में चुनाव से पहले अजीब होड़ लगी है।

कांग्रेस कर रही है 2016 की तैयारी

नरेंद्र तनेजा, वरिष्ठ पत्रकार 

राहुल गांधी को भले ही हाल में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में हुए एआईसीसी के सत्र में कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित न किया गया हो, लेकिन यह तय हो गया कि वे ही कांग्रेस की कॉकपिट में बैठेंगे। 

निखर कर सामने आये हैं राहुल गांधी (Rahul Gandhi)

विनोद शर्मा, राजनीतिक संपादक, हिंदुस्तान टाइम्स

एआईसीसी के सत्र में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का भाषण उनके अपने मानक से अब तक सबसे बेहतरीन भाषण था। इसमें हँसी-मजाक, जोश और वादे थे। कुल मिला कर संतुलित भाषण था।

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राकेश टिकैत का ढोल उनके घर में फट गया

जिन राजनीतिक दलों ने इसमें बढ़-चढ़ कर पीछे से हिस्सा लिया, पैसा दिया, खाने-पीने और आने-जाने का इंतजाम कराया, उन्हें लग रहा है कि यह सारी मेहनत बेकार गयी। यह जो सारा इंतजाम किया गया था, इसका मकसद था उत्तर प्रदेश के चुनाव को प्रभावित करना।

नीरज चोपड़ा की जीत पर लिबरल समाज दुखी क्यों हुआ?

वामपंथियों को नीरज चोपड़ा से ही इतनी नफरत क्यों हो रही है? वह इसलिए क्योंकि नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू जैसे लोग उनके वह मिथक तोड़ रहे हैं, जो वह इतने वर्षों से गढ़ते हुए आ रहे थे।

राज कुंद्रा को लेकर लिबरल समाज की उदारता के मायने

बॉलीवुड और लिबरल जमात का सुशांत सिंह राजपूत की हत्या पर मौन रहना और न्याय की मांग न करना एवं राज कुंद्रा के अपराधों पर चुप्पी साध कर अपराधों के पक्ष में खड़े हो जाना, कहीं-न-कहीं उसके आपराधिक चरित्र को ही दिखाता है। लिबरल समाज तो दिनों-दिन नीचे गिर रहा है।

फिर से चर्च में यौन स्कैंडल और फिर से चुप्पी!

हालाँकि अब निथिराविलाई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हो गया है और आरोपी जेल में है। यह ठीक है कि मामला दर्ज हो गया है, पर प्रगतिशीलों की वाल पर शांति है। मंदिर के भक्त की किसी गलत हरकत पर मंदिर को कोसने वाली प्रगतिशील जमात पादरी के ही सेक्स स्कैंडल में पकडे जाने पर चुप है, कोई हल्ला नहीं है।
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