Sunday, October 2, 2022
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कुमार विश्वास, अगर आपमें दम है, तो दिल्ली में सरकार बनाकर दिखाएं

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

कुमार विश्वास सैनिकों की बात करते हैं और सैनिक कभी मैदान छोड़कर नहीं भागते। इसिलए अगर उनमें दम है, तो केजरीवाल से इस लड़ाई को वे जीतकर दिखाएं। और अगर दम नहीं है, तो उनका हश्र भी वही होने वाला है, जो इस पार्टी में दूसरे तमाम को-फाउंडर्स का हुआ है।

शहीद नहीं, बलि के बकरे थे रोहित वेमुला और रामकिशन ग्रेवाल!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

रोहित वेमुला और अब रामकिशन ग्रेवाल - इन दोनों ने कथित रूप से खुदकुशी की। एक आतंकवादी याकूब मेमन का समर्थक था, लेकिन तथाकथित खुदकुशी के बाद उसे दलित चेतना का प्रतीक घोषित कर दिया गया। दूसरा एक पूर्व फौजी था, जिसने कांग्रेस के 10 साल के शासन में orop लागू नहीं होने पर खुदकुशी नहीं की, लेकिन जब यह काफी हद तक लागू हो गया है, तब खुदकुशी कर ली।

‘आप’ की झाड़ू, ‘आप’ पर!

क़मर वहीद नक़वी, पत्रकार :

आम आदमी पार्टी का बनना देश की राजनीति में एक अलग घटना थी। वह दूसरी पार्टियों की तरह नहीं बनी थी। बल्कि वह मौजूदा तमाम पार्टियों के बरअक्स एक अकेली और इकलौती पार्टी थी, जो इन तमाम पार्टियों के तौर-तरीकों के बिलकुल खिलाफ, बिलकुल उलट होने का दावा कर रही थी। उसका दावा था कि वह ईमानदारी और स्वच्छ राजनीतिक आचरण की मिसाल पेश करेगी। इसलिए 'आप' के प्रयोग को जनता बड़ी उत्सुकता देख रही थी कि क्या वाकई 'आप' राजनीति में आदर्शों की एक ऐसी लकीर खींच पायेगी कि सारी पार्टियों को मजबूर हो कर उसी लकीर पर चलना पड़े।

अदालत में तार्किक अंजाम तक पहुँचे डिग्री विवाद

राजीव रंजन झा : 

चाहे प्रधानमंत्री बनना हो या दिल्ली के आधे-अधूरे राज्य की विधानसभा का सदस्य बनना, उसके लिए कोई डिग्री आवश्यक नहीं है। लेकिन यदि कोई चुनावी प्रक्रिया में झूठा शपथपत्र दाखिल करे तो यह एक गंभीर मसला हो जाता है।

अगर यह मेरा भारत है, तो मैं शर्मिंदा हूँ

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

जिन लोगों ने देशद्रोह के नारे लगाए या लगवाए, वे ठसक से रह रहे हैं, आप उन्हें छू भी नहीं सकते, वे राहुल गाँधी, सीताराम येचुरी और अरविन्द केजरीवाल समेत देश के ढेर सारे नेताओं के रोल मॉडल हैं। लेकिन जिन लोगों ने देशप्रेम के नारे लगाये और तिरंगा फहराया, उन्हें अपनी पहचान तक छुपानी पड़ रही है।

तुगलकी फरमान, जनता परेशान

संजय सिन्हा, संपादक, आज तक :

आदरणीय अरविंद केजरीवाल जी,

नया साल मंगलमय हो।

‘बीमार’ मुख्यमंत्री की भाषा

पद्मपति शर्मा, वरिष्ठ खेल पत्रकार :

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दु:साध्य ब्लड शुगर नें कहीं उनके दिमाग पर तो असर नहीं डाल दिया?

लालू पर केजरीवाल का दो साल पुराना ट्वीट हुआ वायरल

(नीतीश कुमार मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह में लालू प्रसाद यादव और अरविंद केजरीवाल की गलबहियों का का वायरल हुआ चित्र। स्रोत : अज्ञात)

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का दो साल से कुछ ज्यादा पुराना ट्वीट आज एक बार फिर सोशल मीडिया में छा गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के साथ उनका गले मिलना भी लोगों ने फेसबुक और ट्विटर पर खूब शेयर किया।

तमाशों के बताशे खाइए!

कमर वहीद नकवी, वरिष्ठ पत्रकार :  

क्या तमाशा है? इधर तमाशा, उधर तमाशा, यह तमाशा, वह तमाशा! और पूरा देश व्यस्त है तमाशों के बताशों में! तेरा तमाशा सही या उसका तमाशा सही? तेरी गाली, उसकी गाली, तेरी ताली, उसकी ताली, तू गाल बजा, वह गाल बजाये, तेरी पोल, उसकी पोल, कुछ तू खोल, कुछ वह खोले! और देश बैठ कर बताशे तोले कि चीनी कहाँ कम है? कौन कम गलत है? है न अजब तमाशा! 

बीत गये 49 दिन,लापता है जन लोकपाल

संदीप त्रिपाठी :

दिल्ली में आप की सरकार बने और अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री बने आज (4 अप्रैल,(शनिवार) 50वाँ दिन है। पिछली बार सरकार 49 दिन चली थी। तब अरविंद केजरीवाल ने यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि विपक्ष जन लोकपाल पारित करने में सहयोग नहीं कर रहा है।

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