Tuesday, September 21, 2021
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Tag: Ambedkar Jayanti 2016

परोसिए नहीं, अब कलछुल दीजिए!

क़मर वहीद नक़वी, पत्रकार :

इधर आम्बेडकर नाम की लूट मची है, उधर 'मिलेनियम सिटी' गुड़गाँव के लोग अब गुरुग्राम में दंडवत होना सीख रहे हैं! देश में 'आम्बेडकर भक्ति' का क्या रंगारंग नजारा दिख रहा है! रंग-रंग की पार्टियाँ और ढंग-ढंग की पार्टियाँ, सब बताने में लगी हैं कि बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर में तो उनके 'प्राण' बसते हैं। और 'आम्बेडकर छाप' की सबसे पुरानी, सबसे असली दुकान वही हैं! सब एक-दूसरे को कोसने में लगे हैं कि आम्बेडकर के लिए और दलितों के लिए पिछले 68 सालों में किसी ने कुछ नहीं किया। जो कुछ किया, बस उन्होंने ही किया!

क्यों याद आ रहे हैं आम्बेडकर?

क़मर वहीद नक़वी, पत्रकार :

इतिहास के संग्रहालय से झाड़-पोंछ कर जब अचानक किसी महानायक की नुमाइश लगायी जाने लगे, तो समझिए कि राजनीति किसी दिलचस्प मोड़ पर है! इधर आम्बेडकर अचानक उस संघ की आँखों के तारे बन गये हैं, जिसका वह पूरे जीवन भर मुखर विरोध करते रहे, उधर जवाब में 'जय भीम' के साथ 'लाल सलाम' का हमबोला होने लगा है, और तीसरी तरफ हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी उस 'जय भीम', 'जय मीम' की संगत फिर से बिठाने की जुगत में लग गये हैं, जिसकी नाकाम कोशिश किसी जमाने में निजाम हैदराबाद और प्रखर दलित नेता बी। श्याम सुन्दर भी 'दलित-मुस्लिम यूनिटी मूवमेंट' के जरिए कर चुके थे।

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