Monday, January 24, 2022
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लखीमपुर खीरी : विपक्ष की विभाजक राजनीति या फिर प्रियंका गांधी के लिए लॉन्च-पैड?

ऐसा लग रहा है कि उत्तर प्रदेश के बाहर यह आंदोलन राहुल गांधी के कंधों पर है, तो वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंदोलन प्रियंका गांधी को लॉन्च करने के लिए है। मगर इन सबके बीच एक बड़ी रोचक बात हो रही है – वह है वरुण गांधी का भाजपा से दूर जाना।

राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता का सवाल

राजीव रंजन झा

राहुल गांधी पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे हैं। इस नाते वे स्वाभाविक रूप से भारत के ही नागरिक हुए। वे सोनिया गांधी के बेटे हैं। उनके जन्म के समय सोनिया गांधी इटली की नागरिक थीं। इस नाते इटली के कानूनों के अनुसार राहुल गांधी अपने-आप ही इटली की नागरिकता के पात्र बन जाते हैं। 

क्यों फिर उल्टा पड़ गया कांग्रेस का दाँव

कांग्रेस अध्यक्षों की सूची 1947 से नहीं, 1978 से देखें...

राजीव रंजन झा : 

शशि थरूर कांग्रेस के नये मणिशंकर अय्यर बन गये हैं। वे अपनी समझ से तो भाजपा पर बहुत धारदार हमला करते हैं, पर भाजपा उनका फेंका हुआ हथगोला लपक कर वापस कांग्रेसी खेमे पर ही उछाल दे रही हैं।

राहुल के हाथों अन्ना का अनशन तुड़वाने की थी योजना?

अन्ना आंदोलन को करीब से देखने वाले पत्रकार अनुरंजन झा ने इसके कई अनछुए अनजाने पहलुओं को पहली बार सामने लाते हुए एक किताब लिखी है - रामलीला मैदान। इसी किताब से प्रस्तुत है वह हिस्सा, जहाँ अनुरंजन जिक्र कर रहे हैं कि कई सारे ऐसे समाज-सेवी और बुद्धिजीवी जो आंदोलन के शुरुआत के दिनों में मूवमेंट में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे या फिर धुर विरोधी थे, लेकिन एक समय वे एक-एक कर मंच पर आने लगे थे। क्या उनका आना अनायास था या फिर सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था...

राहुल को पूरा ‘श्रेय’ दिलाना चाहती हैं प्रियंका?

राजीव रंजन झा : 

प्रियंका वाड्रा पाँच राज्यों के विधान सभा चुनावों में अब तक चुनाव प्रचार में नहीं उतरी हैं, जबकि पहले कहा जा रहा था कि वे इस बार काफी सक्रिय रहेंगी।

राहुल का भूकंप, मोदी का भूकंप, खेल नैरेटिव का

राजीव रंजन झा : 

जब राहुल गांधी भूकंप शब्द का इस्तेमाल एक राजनीतिक संदेश देने के लिए करते हैं, तो यह असंवेदनशील नहीं होता है।

अमीरों को लेकर राहुल जी से चार सवाल

राजीव रंजन झा : 

विधानसभाओं के चुनाव अभियान के दरम्यान राहुल गांधी ने कहा कि नरेंद्र मोदी 50 अमीरों के लिए काम करते हैं। हो सकता है कि राहुल सच बोल रहे हों। इसलिए उनसे दरख्वास्त है कि वे जरा बतायें -

शहीद नहीं, बलि के बकरे थे रोहित वेमुला और रामकिशन ग्रेवाल!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

रोहित वेमुला और अब रामकिशन ग्रेवाल - इन दोनों ने कथित रूप से खुदकुशी की। एक आतंकवादी याकूब मेमन का समर्थक था, लेकिन तथाकथित खुदकुशी के बाद उसे दलित चेतना का प्रतीक घोषित कर दिया गया। दूसरा एक पूर्व फौजी था, जिसने कांग्रेस के 10 साल के शासन में orop लागू नहीं होने पर खुदकुशी नहीं की, लेकिन जब यह काफी हद तक लागू हो गया है, तब खुदकुशी कर ली।

काँग्रेस : बस ‘टीना’ में ही जीना!

क़मर वहीद नक़वी, पत्रकार :

प्रशान्त किशोर ने काँग्रेस को एक 'क्विक फिक्स' फार्मूला दिया है। ब्राह्मणों को पार्टी के तम्बू में वापस लाओ। फार्मूला सीधा है। जब तक ब्राह्मण काँग्रेस के साथ नहीं आते, तब तक उत्तर प्रदेश में मुसलमान भी काँग्रेस के साथ नहीं आयेंगे। क्योंकि मुसलमान तो उधर ही जायेंगे, जो बीजेपी के खिलाफ जीत सके। मायावती के कारण अब दलित तो टूटने से रहे। तो कम से कम मुसलमान और ब्राह्मण तो काँग्रेस के साथ आयें! हालाँकि यह कोई नया फार्मूला नहीं है। उत्तर प्रदेश में तो चाय की चौपालों पर चुस्की मारने वाला हर बन्दा जानता है कि 2007 में ठीक इसी दलित-ब्राह्मण-मुसलमान की 'सोशल इंजीनियरिंग' से मायावती ने कैसे बहुमत पा लिया था।

दलों में लोकतंत्र खत्म होने का नतीजा है वंशवाद

राजीव रंजन झा : 

बिहार के चुनावी नतीजों और उसके बाद खास कर तेजस्वी यादव को बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाये जाने के बाद एक बार फिर से वंशवाद पर बहस छिड़ गयी है। बिहार सरकार में तेजस्वी यादव को उपमुख्यमंत्री और तेज प्रताप यादव को कैबिनेट बनाये जाने पर लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती ने जवाब दिया है कि जनता ने उन्हें चुन कर भेजा है। यह वही तर्क है, जो कभी सारे कांग्रेसी राहुल गांधी के लिए और उससे पहले राजीव गांधी और उससे भी पहले इंदिरा गांधी के लिए देते रहे हैं। 

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