Saturday, July 2, 2022
टैग्स नरेंद्र मोदी

Tag: नरेंद्र मोदी

आरएसएस पर नेहरू का वह अभियान, जिसे मोदी ने पलट दिया

देश में आरएसएस पर 18 महीने तक प्रतिबंध रहा और इस दौरान नेहरू की सरकार में नियोजित तरीके से समाज में आरएसएस का दानवीकरण करने का अभियान चला। उस समय महज दो शब्द कहने से लोगों की सामाजिक प्रतिष्ठा चली जाती थी, सरकारी दफ्तरों में काम कर रहे अधिकारी-कर्मचारियों की नौकरी चली जाती थी, व्यापारियों पर मुकदमे हो जाते थे। वे दो शब्द थे - आरएसएस एजेंट।

प्रधानमंत्री मोदी की कमला हैरिस के साथ बातचीत ही ज्यादा महत्वपूर्ण

बारीकियों वाली बातें कमला हैरिस के साथ हुई हैं। खास तौर से इसलिए, कि कमला हैरिस एक तो अपने देश की पहली महिला उपराष्ट्रपति तो हैं ही, ऐसा लगता है कि संभवत: आगे जाकर कभी वे अमेरिका की पहली महिला राष्ट्रपति भी बन सकती हैं। वे भारतीय मूल की हैं, तो और भी इन बातों का महत्व था।

कोरोना की लड़ाई तो हम तभी हार गये थे जब…

एक हारी हुई लड़ाई के लिए कोई तो दोषी ठहराया ही जायेगा। तो वह दोषी खोज निकाला गया है। वह दोषी है हिंदू मध्यम वर्ग, जो सेक्युलिबरलों के अनुसार नफरती बन गया है।

चीन से लड़ने को ललकारती आवाजों का असली मतलब क्या है?

राजीव रंजन झा : 

चीन से लड़ लोगे क्या? लड़ पाओगे क्या? बहुत ताकतवर है हमसे। 

दरअसल 1962 की हार के बाद यह भारतीय मानस में बैठ गया है कि हम पाकिस्तान को तो कभी धूल चटा सकते हैं, लेकिन चीन से पार पाना संभव नहीं है।

क्या 14 अप्रैल के बाद खत्म हो जायेगा लॉकडाउन

राजीव रंजन झा : 

कल अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू के ट्वीट हवाले से खबर चल गयी कि लॉकडाउन 15 अप्रैल को खत्म हो जायेगा। फिर यह ट्वीट हटा ली गयी।

कोरोना वायरस की महामारी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संबोधन, 22 मार्च को जनता कर्फ्यू

मेरे प्रिय देशवासियों,

पूरा विश्व इस समय संकट के बहुत बड़े गंभीर दौर से गुजर रहा है। आम तौर पर कभी जब कोई प्राकृतिक संकट आता है तो वह कुछ देशों या राज्यों तक ही सीमित रहता है। लेकिन इस बार ये संकट ऐसा है, जिसने विश्व भर में पूरी मानव जाति को संकट में डाल दिया है।

डोनाल्ड ट्रंप लालायित हैं भारतीयों के समर्थन के लिए

राजीव रंजन झा : 

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दोस्ती तस्वीरों के लिए अच्छी है। मोदी और बराक ओबामा की दोस्ती भी तस्वीरों के लिए बहुत अच्छी थी। और तस्वीरें तो मोदी के साथ शी जिनपिंग की भी बहुत अच्छी थीं।

कौन चुनता है प्रधानमंत्री? सांसद, या जनता?

राजीव रंजन झा : 

इस देश की जनता सांसद चुनती है, प्रधानमंत्री नहीं। 

यही संविधान है ना!

क्यों फिर उल्टा पड़ गया कांग्रेस का दाँव

कांग्रेस अध्यक्षों की सूची 1947 से नहीं, 1978 से देखें...

राजीव रंजन झा : 

शशि थरूर कांग्रेस के नये मणिशंकर अय्यर बन गये हैं। वे अपनी समझ से तो भाजपा पर बहुत धारदार हमला करते हैं, पर भाजपा उनका फेंका हुआ हथगोला लपक कर वापस कांग्रेसी खेमे पर ही उछाल दे रही हैं।

चीन से दोस्ती नहीं, पर सहयोग संभव : जी. पार्थसारथी

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिनों की चीन यात्रा ने एक तरफ जहाँ कूटनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी तो दूसरी ओर विपक्ष ने इस यात्रा को लेकर सवाल उठाये कि इससे हासिल क्या हुआ है? इस यात्रा के मायने क्या हैं और उससे भारत-चीन संबंधों की गाड़ी किस दिशा में बढ़ी है, यह समझने के लिए देश मंथन की ओर से राजीव रंजन झा ने बातचीत की भारत के पूर्व राजदूत जी. पार्थसारथी से।  

- Advertisment -

Most Read

उदयपुर की घटना : आतंकी हत्या पर सेक्युलरों ने सभी धर्मों को क्यों लपेटा?

उदयपुर में हुई जिहादी घटना ने जैसे सारा विमर्श ही मात्र एक विषय पर लाकर रख दिया है, और वह है कट्टरपंथी इस्लामिक जिहाद।...

गैंगवार के आतंक से फिर सहमा वासेपुर

भैया, यह वासेपुर है। कबूतर भी एक पंख से उड़ता है तो दूसरे पंख से इज्जत ढकता है। यहाँ अब इज्जत ढकने का सवाल नहीं है। जिंदा लोगों के लाशों में तब्दील होने की जंग है। इस बार जंग में शामिल है जेल में सजा काट रहे फहीम खान की सल्तनत के लिए चुनौती बन कर उभरा छोटे सरकार उर्फ प्रिंस खान। इस जंग में ड्रामा है, थ्रिल है, सस्पेंस है...

द कश्मीर फाइल्स : विवेक अग्निहोत्री ने उठा दी झूठ की दुकान

विवेक अग्निहोत्री की सफलता यही है कि उन्होंने विमर्श की दिशा मोड़ दी। उन्होंने बस दर्द को जस-का-तस परोस दिया, जो इतने वर्षों से झेलम नदी में कश्मीरियत की हरी काई के नीचे दबा था और अब वह दर्द बह कर नीचे उस मैदान में आ गया है, जहाँ तक आने से लिबरल जमात उसे रोक रही थी!

किसानों की आमदनी दोगुनी करने में कितना योगदान कर सकेगा बजट 2022?

क्या किसान की आमदनी 100 से बढ़ा कर 200 रुपये करने के लिए उपभोक्ता का खर्च 400 से बढ़ा कर 800 रुपये किया जाना ऐसा विकल्प है, जिसे लोग पसंद करेंगे? क्या आप तैयार हैं कि जो आटा 40 रुपये किलो खरीदते हैं, उसे 80 रुपये में खरीदने लगें और जो दाल 100 रुपये किलो खरीद रहे हैं, उसे 200 रुपये में खरीदने लगें? क्या किसानों की आमदनी दोगुनी करने का मतलब यह है कि खाद्य महँगाई भी दोगुनी हो जायेगी?
Cart
  • No products in the cart.