Thursday, February 25, 2021
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गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण

दसवीं की परीक्षा में गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण करने के लिए कहा गया। एक छात्र ने उसका चरित्र चित्रण कुछ इस तरह लिखा : 

तेज दौड़ने की गति परीक्षा

पुरुषों के लिए : आप की पत्नी कितना तेज दौड़ सकती है, यह देखना है तो जोर से यह चिल्लाइये - 

दवा जो पूरे शहर में नहीं मिली

मरीज - डॉक्टर साहब, आपने पर्चे के पीछे जो दवा लिखी है, वह पूरे शहर में कहीं नहीं मिल रही है। क्या करूँ?

सुंदर लड़की का हाथ पाने के लिए

एक लड़के ने बड़ी उत्कंठा से एक साधु बाबा से पूछा - बाबा जी, किसी सुंदर लड़की का हाथ पाने के लिए क्या करना चाहिए?

कानपुर में कौन था विराट कोहली का सलाहकार

कानपुर में भारतीय क्रिकेट टीम को मिली हार कैसे जुड़ती है विधानसभा चुनाव से, यह बताया है वरिष्ठ व्यंग्यकार आलोक पुराणिक ने।

यूपी में बिना गठबंधन किसे मिली जीत

यूपी में बिना गठबंधन किये मिली एक जीत पर वरिष्ठ व्यंग्यकार आलोक पुराणिक की चुटकी।

इसको कहीं देखा है

एक पागल आइने  में खुद को देख कर सोचने लगा कि यार इसको कहीं देखा है।

मच्छरों की विधवाएँ

मालिक ने नौकर से कहा - मच्छर मार दो, बहुत हो गये हैं...!

विमान में घर जैसा माहौल

आदमी हवाई जहाज़ से उतरा तो दरवाजे पर खड़ी एयर होस्टेस बोली -

क्या चुनाव लड़ने आ गया गब्बर!

यहाँ से 50-50 कोस तक जब कोई चुनाव होता है... 

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बिहार चुनाव में क्या फिर पलटी मारेंगे उपेंद्र कुशवाहा?

संदीप त्रिपाठी : 

बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व महागठबंधन में नया घमासान शुरू हो गया है। महागठबंधन में राजद नेता तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में पेश किये जाने पर महागठबंधन के दो सहयोगी दलों - राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) ने आवाज उठायी है। 

महागठबंधन से मुकाबले से पूर्व एनडीए में अंदरूनी घमासान

संदीप त्रिपाठी : 

बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए में जबरदस्त रार मची हुई है। बिहार में एनडीए में कुल चार दल भाजपा, जदयू, लोजपा और हम (हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) हैं।

बिहार में महागठबंधन की छोटी पार्टियों की बड़बोली माँगें

संदीप त्रिपाठी

बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन में सीटों के बंटवारे पर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। दरअसल पिछले चुनाव में महागठबंधन का हिस्सा बन कर लड़ने वाली जदयू के गठबंधन से निकल जाने के बाद अब शेष बड़े दल राजद और कांग्रेस इस बार ज्यादा-से-ज्यादा सीटें अपने पास रखने के पक्ष में हैं।

कोरोना की लड़ाई तो हम तभी हार गये थे जब…

राजीव रंजन झा : 

कोरोना की श्रृंखला तोड़ने की लड़ाई हम उसी दिन हार गये थे, जब दिल्ली में हजारों-लाखों मजदूरों की भीड़ को उत्तर प्रदेश की बस चलने के नाम पर आनंद विहार में जुटा दिया गया था।