अभय मुद्रा में 80 फीट के गौतम बुद्ध

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विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :

साल 2011 में सारनाथ में एक और आकर्षण जुड़ गया है, वह है विशाल बुद्ध प्रतिमा। वाराणसी के पास स्थित दर्शनीय स्थल सारनाथ में वैसे तो सैलानियों कई आकर्षण है। सारनाथ के इतिहास में अब एक नया अध्याय जुड़ गया है। अब जब आप सारनाथ जाएँगे तो वहाँ भगवान बुद्ध की चलायमान अभय मुद्रा में बनी देश की सबसे ऊँची लगभग 80 फीट प्रतिमा देखने को मिलेगी। हालाँकि सारनाथ में पहले से ही बुद्ध की प्रतिमा है लेकिन बुद्ध की चलायमान प्रतिमा अनूठी है।

ये प्रतिमा सारनाथ संग्रहालय के पास ही थाई बौद्ध विहार में स्थापित की गयी है। इसके निर्माण में कुल 14 साल का वक्त लगा है। प्रतिमा के निर्माण का कार्य 1997 में आरंभ हुआ था। हालाँकि इसके निर्माण की योजना 1970 में ही बनी थी। इसका निर्माण भारत और थाईलैंड के सहयोग से हुआ है। ये प्रतिमा थाई बौद्ध विहार के ढाई एकड़ के परिसर में स्थित है। इसके निर्माण में 2 करोड़ की राशि खर्च हुई है। इसके निर्माण में कई बौद्ध संस्थाओं ने दान दिया है। प्रतिमा के आसपास खूबसूरत पार्क है। इसे वाराणसी के पास चुनार से लाए गये पत्थरों से बनाया गया है। इसमें कुल 815 पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इस प्रतिमा का अनावरण 16 मार्च 2011 को किया गया।

हैदराबाद के हुसैनसागर झील में भी गौतम बुद्ध की ग्रेनाइट से बनी प्रतिमा लगी है लेकिन ये प्रतिमा 60 फीट के आसपास की है लेकिन सारनाथ में लगी गौतम बुद्ध की प्रतिमा 80 फीट की होने के कारण देश में सबसे ऊँची मानी जा रही है। बोधगया में ज्ञान प्राप्ति के बाद सारनाथ ही वह जगह जहाँ गौतम बुद्ध ने अपना पहला संदेश उन पाँच शिष्यों को दिया था जो कभी गौतम बुद्ध का साथ छोड़ कर चले गये थे। इस घटना को धर्म चक्र परिवर्तन की संज्ञा दी गयी थी। गौतम बुद्ध के जीवन में और बौद्ध धर्म के इतिहास में सारनाथ का खास महत्व है।

कैसे पहुँचे

वाराणसी जंक्शन से छह किलोमीटर दूर सारनाथ पहुँचना आसान है। यहाँ पर धमेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, मूलगंध कुटी मंदिर,संग्रहालय, सारनाथ के खंडहर, सुरंग, चिड़ियाघर जैसी कई चीजें देखने लायक पहले से ही हैं। अब सारनाथ में बौद्ध प्रतिमा बड़ा आकर्षण बन गयी है। इसलिए जब आप अगली बार वाराणसी जाएँ तो सारनाथ में गौतम बुद्ध की प्रतिमा के दर्शन करना न भूलें। हाँ सारनाथ को घूमने का सबसे बेहतर तरीका है कि ज्यादा से ज्यादा पैदल चलें।

(देश मंथन 08 फरवरी 2016)

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