Saturday, January 23, 2021
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मकान ले लो, मकान

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

मेरे मित्र को एक मकान चाहिए। वैसे दिल्ली में उनके पिता जी ने एक मकान बनवाया है और अब तक वो उसमें उनके साथ ही रह रहे थे। लेकिन कुछ साल पहले उनकी शादी हो गयी और उन्हें तब से लग रहा है कि उन्हें अब अलग रहना चाहिए। मैंने अपने मित्र से पूछा भी कि पिताजी के साथ रहने में क्या मुश्किल है?

कुलधरा – पालीवाल ब्राह्मणों का एक अभिशप्त गाँव

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

एक गाँव जो कभी आबाद था। हजारों लोग रहते थे। सुबह शाम संगीत गूंजता था। पर अब सिर्फ खंडहर। हम बात कर रहे हैं कुलधरा की। आज इसकी गिनती देश के कुछ प्रमुख भुतहा स्थलों में होती है।

नवेली दुल्हन सा सिंगार किए पटवा हवेली

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

जैसलमेर की पटवा हवेली। शहर की सभी पुरानी हवेलियों में सबसे समृद्ध। वैसे तो जैसलमेर के टूरिस्ट मैप में पटवा हवेली, नाथमल की हवेली, सलीम सिंह की हवेली जैसे कई नाम गिनाए जाते हैं।

जैसलमेर की शान – सोनार किला

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

मशहूर बांग्ला फिल्मकार सत्यजीत रे ने एक फिल्म बनायी थी सोनार किला। 1974 में रीलिज यह फिल्म बंगाली मानुष के बीच खूब लोकप्रिय हुई। यह 1971 के एक उपन्यास पर बनी फिल्म थी।

सुनहला शहर, गोल्डेन सिटी जैसलमेर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

राजस्थान का जैसलमेर शहर यानी गोल्डेन सिटी। सुनहला शहर। सारा शहर पीले सोने की तरह दमकता दिखाई देता है। क्योंकि ज्यादातर इमारतें स्थानीय तौर पर मिलने वाले पीले रंग के पत्थरों से बनी हैं।

लीलण एक्सप्रेस से सुनहले शहर जैसलमेर की ओर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

बीकानेर से जैसलमेर जाने वाली ट्रेन का नाम लीलण एक्सप्रेस (12468) है। नाम कुछ अनूठा लगा तो जानने की इच्छा हुई।

पापड़, भुजिया, दालमोट मतलब बीकानेर

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

पापड़, भुजिया और दालमोट। मतलब बीकानेर। राजस्थान का बीकानेर शहर। बीकानेर कई बातों के लिए जाना जाता है।

यमराज की सेल्फी

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार :   

सावित्री परेशान थी कि हाय सत्यवान की जान कैसे बचेगी। यमराज आयेंगे, तो सत्यवान के प्राण लिये बगैर तो ना मानेंगे। यमराज की ड्यूटी-पराणयता की बात तो जगत में सबको ज्ञात थी।

रिश्तों में निवेश कीजिए

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

चार साल पहले भी मेरा नाम संजय सिन्हा था। लेकिन तब मैं संजय सिन्हा की जिंदगी जीता था। 

रिश्तों के बारे में आत्ममंथन करें

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : 

मुझे अपने परिचित से पूछना ही नहीं चाहिए था कि तुम्हारी मौसी कहाँ चली गईं? मैंने पूछ कर बहुत बड़ी गलती की और उस गलती का खामियाजा ये है कि आज कुछ लिखने का मन ही नहीं कर रहा है। रात भर सोने का उपक्रम करता रहा, करवटें बदलता रहा। फिर लगा कि आपसे इस बात को साझा कर लूं, शायद मेरा दुख थोड़ा कम हो जाए। 

हाँ, अकबर नाम है मेरा… शहंशाह गुजरे जमाने का…

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

धुआं उड़ाती सिटी बजाती रेलगाड़ियां अब इतिहास हो चुकी हैं। या तो फिल्मों में देखा होगा आपने या बुजुर्गों से सुना होगा। हरियाणा के रेवाड़ी के स्टीम शेड में कुल 10 स्टीम लोकोमोटिव देखे जा सकते हैं। इसमें कुछ चालू हालत में हैं। इनमें से एक है अकबर। शान से खड़ा यह विशाल स्टीम लोकोमोटिव जैसे आपसे कह रहा हो अकबर नाम है मेरा...

फेयरी क्वीन से एक मुलाकात

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार:  

दिल्ली से रेवाड़ी। हरियाणा का शहर। दूरी 80 किलोमीटर। पहचान स्टीम लोकोमोटिव का सुंदर संग्रहालय। रेलवे के इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए रेवाड़ी के स्टीम लोकोमोटिव संग्रहालय की यात्रा जरूरी है।

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