Monday, January 24, 2022
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कांग्रेस

अब राहुल बचाओ!

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

कांग्रेस खुद को तो बचा न सकी। अब वह राहुल को बचाने में लगी हुई है। सोनिया गांधी के दरबारी सलाहकार, जिन्हें हम ‘बड़े नेता’ कहें तो उन्हें अच्छा लगता है, वे इकट्ठे होकर सोच रहे हैं कि अब क्या करें?

सियासत की गलियों से अलविदा हो जायेंगे मनमोहन?

विकास मिश्रा, आजतक :

मनमोहन सिंह अब कभी किसी सियासी मंच पर नजर नहीं आयेंगे। नेपथ्य से निकलकर अचानक सियासत के मंच पर आये थे और देश के सबसे बड़े पद तक पहुँचे।

प्रियंका के प्रति मेरी सहानुभूति

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक :

प्रियंका वाड्रा ने शिकायत की है कि उनके भाई और मां के चुनाव क्षेत्र में कई लोग ऐसी पुस्तिकाएँ बंटवा रहे हैं, जो घोर आपत्तिजनक हैं। ये पुस्तिकाएँ वे रात के अंधरे में लोगों के घरों में डलवा रहे हैं।

‘कम बोला, काम बोला’, पर ये कौन बोला?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ संपादक (राजनीतिक), एनडीटीवी :

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रह चुके संजय बारू की किताब ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ ने इन दिनों तहलका मचा रखा है। बारू ने प्रधानमंत्री कार्यालय में अपने संस्मरणों का जिक्र इस किताब में किया है।

पटरी से उतरता कांग्रेस का अभियान?

अखिलेश शर्मा, वरिष्ठ संपादक (राजनीतिक), एनडीटीवी :

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी ही खींची लक्ष्मण रेखा शुक्रवार को पार कर ली। जम्मू के डोडा में एक चुनावी सभा में उन्होंने एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर पहली बार व्यक्तिगत हमला किया।

पपेटियर

अमिष श्रीवास्तव, वॉयस ऑफ अमेरिका :

श्रीमती सोनिया गाँधी कांग्रेस के सवा सौ साल के इतिहास मे सबसे लंबे समय तक रहने वाली अध्यक्ष हैं। बेकार की जानकारी है ये, लेकिन दे रहा हूँ क्योंकि एक बार पढ़ कर मैं चौंक गया था।

भटकते राहुल गाँधी क्या खोज रहे हैं

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक :

देश के हर रंग को साथ जोड़कर ही कांग्रेस बनी थी और आज कांग्रेस के नेता राहुल गाँधी को कांग्रेस को गढ़ने के लिये देश के हर रंग के पास जाना पड़ रहा है।

निखर कर सामने आये हैं राहुल गांधी (Rahul Gandhi)

विनोद शर्मा, राजनीतिक संपादक, हिंदुस्तान टाइम्स

एआईसीसी के सत्र में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का भाषण उनके अपने मानक से अब तक सबसे बेहतरीन भाषण था। इसमें हँसी-मजाक, जोश और वादे थे। कुल मिला कर संतुलित भाषण था।

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