Sunday, January 24, 2021
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राजनीति

बहुत कुछ कहता है आशुतोष और आशीष का इस्तीफा

संदीप त्रिपाठी स्वतंत्रता दिवस पर आम आदमी पार्टी (आआपा) से दो स्तंभाकार नेता स्वतंत्र हुए। एक आशुतोष और दूसरे आशीष खेतान। इनमें आशुतोष ने...

त्रिपुरा में लड़ाई सीपीएम बनाम भाजपा की

विद्युत प्रकाश मौर्य :

तीन जनवरी की सुबह। नार्थ त्रिपुरा जिले का कैलाशहर नगर। महिलाएँ सड़क पर रैली निकाल रही हैं। जीतेगा भाई जीतेगा, बीजेपी जीतेगा। अभी त्रिपुरा में चुनाव का ऐलान नहीं हुआ है,  पर सड़कों पर प्रचार चरम पर आ चुका है। अगले दिन कैलाशहर बाजार में बीजेपी के साइकिल यात्री नजर आते हैं। वे जन जागरण अभियान पर निकल रहे हैं। मैं उन्हें रोक कर पूछता हूँ - मुद्दा क्या है? वे कहते हैं - नौकरी नहीं है, अस्पतालों में दवाएँ नहीं हैं, डॉक्टर नहीं हैं।

15 लाख के टोटा-रतंट का सच!

राजीव रंजन झा : 

जब कोई याद दिलाना चाहे कि 15 लाख के "वादे" पर मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तो उनसे पूछिये कि जिस दिन यह "वादा" किया गया होगा, उस दिन अखबारों ने इसे पहले पन्ने पर पहली खबर बना कर इस "वादे" को अपनी सुर्खियों में जगह दी होगी ना? चैनलों ने दिन में पचास बार इसकी हेडलाइन चलायी होगी ना? और हाँ, फिर आपने भी इस "वादे" के समर्थन-विरोध में फेसबुक-ट्विटर जैसे लोक-माध्यमों पर कुछ कहा होगा ना? तभी तो देश ने इस "वादे" पर मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया? 

बंगाल में मुख्य मुकाबले में आयी भाजपा

संदीप त्रिपाठी :

पश्चिम बंगाल के हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने विरोधियों को धूल-धुसरित करते हुए अपना परचम लहराया है। लेकिन इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह पहलू है कि भारतीय जनता पार्टी इन चुनावों में दूसरे स्थान पर रही है।

कुमार विश्वास, अगर आपमें दम है, तो दिल्ली में सरकार बनाकर दिखाएं

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

कुमार विश्वास सैनिकों की बात करते हैं और सैनिक कभी मैदान छोड़कर नहीं भागते। इसिलए अगर उनमें दम है, तो केजरीवाल से इस लड़ाई को वे जीतकर दिखाएं। और अगर दम नहीं है, तो उनका हश्र भी वही होने वाला है, जो इस पार्टी में दूसरे तमाम को-फाउंडर्स का हुआ है।

मोदी की जीत कहकर केजरीवाल की हार को छोटी मत कीजिए!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

मीडिया हर रोज पीएम मोदी का जादू टेस्ट करता है। एमसीडी चुनाव में बीजेपी की जीत को भी वह पीएम मोदी का ही जादू बता रहा है। लेकिन वह यह बताने में संकोच कर रहा है कि यह बीजेपी की जितनी बड़ी जीत नहीं है, उससे कहीं अधिक बड़ी केजरीवाल की हार है। शायद विज्ञापन बहादुर केजरीवाल के विज्ञापनों का मोह उसे यह सच बताने से रोक रहा है।

मोदी की जीत कहकर केजरीवाल की हार को छोटी मत कीजिए!

अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

मीडिया हर रोज पीएम मोदी का जादू टेस्ट करता है। एमसीडी चुनाव में बीजेपी की जीत को भी वह पीएम मोदी का ही जादू बता रहा है। लेकिन वह यह बताने में संकोच कर रहा है कि यह बीजेपी की जितनी बड़ी जीत नहीं है, उससे कहीं अधिक बड़ी केजरीवाल की हार है। शायद विज्ञापन बहादुर केजरीवाल के विज्ञापनों का मोह उसे यह सच बताने से रोक रहा है।

वैचारिक आत्मदैन्य से बाहर आती भाजपा

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

उत्तर प्रदेश अरसे बाद एक ऐसे मुख्यमंत्री से रूबरू है, जिसे राजनीति के मैदान में बहुत गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था।

भारतीय राजनीति का ‘मोदी समय’

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

चुनावों का संदेशः अपनी रणनीति पर विचार करे विपक्ष

सही मायनों में यह भारतीय राजनीति का ‘मोदी समय’ है। नरेंद्र मोदी हमारे समय की ऐसी परिघटना बन गए हैं, जिनसे निपटने के हथियार हाल-फिलहाल विपक्ष के पास नहीं हैं।

उत्तम प्रदेश में प्रजापति करते थे प्रजा से बलात्कार- इस तरह बोलता था ‘काम!’

अभिरंजन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार :

इक्कीसवीं सदी की जवानी परवान पर थी। सोलहवाँ साल अभी-अभी पूरा हुआ था। सत्रहवाँ लग चुका था। ‘उत्तम प्रदेश’ में ‘समाजवादी प्रजातंत्र’ का जबर्दस्त जलवा था। जलवा भी ऐसा-वैसा नहीं! बस यूँ समझ लीजिए कि ‘काम’ बोलता था। ‘प्रजातंत्र’ के ‘प्रजापति’ लोग ‘कामुकता’ की पराकाष्ठा पार कर चुके थे। वे मानते थे कि वे ‘प्रजा’ के ‘पति’ हैं, इसलिए उन्हें ‘प्रजा’ के साथ वह सब करने का अधिकार है, जो एक पति अपनी पत्नी के साथ करता है। पीड़ित ‘प्रजा’ भले इसे बलात्कार मानती थी, लेकिन वे स्वयं इसे ‘काम’ समझकर ही अंजाम दिया करते थे।

राजनीति के बिगड़े बोल

संजय द्विवेदी, अध्यक्ष, जनसंचार विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय : 

भारतीय राजनीति में भाषा की ऐसी गिरावट शायद पहले कभी नहीं देखी गयी। ऊपर से नीचे तक सड़कछाप भाषा ने अपनी बड़ी जगह बना ली है। ये ऐसा समय है जब शब्द सहमे हुए हैं, क्योंकि उनके दुरूपयोग की घटनाएं लगातार जारी हैं। राजनीति जिसे देश चलाना है और देश को रास्ता दिखाना है,वह खुद गहरे भटकाव की शिकार है।

डॉ. मनमोहन सिंह की असली कला तो ये थी…

[caption id="attachment_8762" align="alignnone" width=""]गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उनके पुत्र पंकज सिंह[/caption]

राजीव रंजन झा : 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुटकी ली कि बाथरूम में रेनकोट पहन कर नहाने की कला डॉक्टर साहब ही जानते हैं। पर असल में डॉ. मनमोहन सिंह की कला इससे भी बड़ी है। 

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संदीप त्रिपाठी : 

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