नुसरत जहां : कहीं राजनीतिक दाँव-पेंच ही तो नहीं था?

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(नुसरत जहां का 26 अक्टूबर 2020 का ट्वीट)

बंगाल चुनावों के मध्य ही यह बात बार-बार उभर कर आ रही थी कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां और उनके पति निखिल जैन के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और वे अलग-अलग हैं! अब सामने आया है कि वे गर्भवती हैं और उनके पति ने कहा कि उन्हें इस विषय में कुछ […]

बंगाल चुनावों के मध्य ही यह बात बार-बार उभर कर आ रही थी कि तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां और उनके पति निखिल जैन के बीच सब कुछ ठीक नहीं है और वे अलग-अलग हैं! अब सामने आया है कि वे गर्भवती हैं और उनके पति ने कहा कि उन्हें इस विषय में कुछ नहीं पता क्योंकि वे अलग हो चुके हैं।
शादी में अलगाव कोई विशेष बात नहीं है, अब यह बहुत आम हो गया है। परंतु यह बात कुछ अलग है! यह इसलिए अलग है, क्योंकि यह शादी होते भी एक रहस्य था। नुसरत जहां ने एक जैन से शादी की थी। और अब दो साल के भीतर ही यह शादी टूट गयी है।
यह शादी इसलिए खास हो गयी थी, क्योंकि इस शादी का प्रचार बहुत किया गया था। यह शादी कथित रूप से एक ऐसी शादी के रूप में प्रचारित की गयी कि यह सांस्कृतिक क्रांति है। एक मुसलमान लड़की एक जैन परिवार में शादी ही नहीं कर सकती है, बल्कि वह हिंदू रीति-रिवाज भी अपना सकती है। एक ऐसी परिकल्पना रची गयी, जैसे इससे बड़ा कोई धर्मनिरपेक्ष कदम नहीं है।
मीडिया के लिए तो जैसे नुसरत समस्त अच्छाइयों का प्रतीक बन गयी थीं। परंतु उन्होंने अपनी शादी को लेकर अब जो बयान दिया है, वह बेहद चौंकाने वाला है! उससे कई प्रश्न उत्पन्न होते हैं। उन्होंने कहा कि उनकी शादी कानूनी नहीं है। चूँकि यह शादी तुर्की में हुई थी, और यह अंतरधार्मिक शादी है, तो एक तो तुर्की के कानून के हिसाब से यह मान्य नहीं है, अर्थात् वहाँ पर यह पंजीकृत नहीं हो सकती है। और दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात जो प्रश्न उठाती है, वह यह कि जब वे कहती हैं कि इस शादी को भारत में विशेष विवाह अधिनियम (स्पेशल मैरिज ऐक्ट) के अंतर्गत पंजीकृत कराये जाने की जरूरत थी, मगर ऐसा नहीं हुआ तो यह भारत में भी मान्य नहीं है!
इसलिए चूँकि यह शादी है ही नहीं, तो इसे लिव इन कह सकते हैं।
इससे दो प्रश्न खड़े होते हैं। एक तो यह कि कहीं जान-बूझकर ममता बनर्जी के प्रति हिंदुओं के मन में सहानुभूति पैदा करने के लिए तो यह कदम नहीं उठाया गया, क्योंकि नुसरत की शादी के बाद ममता बनर्जी भी नुसरत को बधाई देने के लिए पहुँची थीं। नुसरत ने दुर्गा पूजा में जो नृत्य किया, उसे भी काफी सराहा गया था।
जब उनके खिलाफ फतवा जारी हुआ तब तो उन्हें एकदम से नायिका या दुर्गा की ही उपाधि दे दी गयी थी।
इतना ही नहीं, उनके करवा चौथ व्रत की भी तस्वीरें वायरल हुई थीं।
अब वे कह रही हैं कि उनके इस रिश्ते का कोई कानूनी मूल्य नहीं है। तो क्या यह महज मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए एक खेला खेला गया था, जिसमें कहीं-न-कहीं नुसरत के पति भी शामिल थे, क्योंकि ऐसा हो नहीं सकता कि बाहर डेस्टिनेशन वेडिंग तो करा लें, मगर भारत में आकर शादी के पंजीकरण की न सोचें?
यदि ऐसा दोनों के ही दिमाग में नहीं आया था तो क्या यह दोनों की मिली-जुली चाल थी, तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में एक निष्पक्ष लहर बनाने की या फिर वाकई नुसरत के कारण निखिल जैन ने विशेष विवाह अधिनियम में पंजीकरण नहीं कराया। हालाँकि हिंदुओं के लिए इतना ही पर्याप्त था कि नुसरत ने निखिल जैन से शादी की है और वे बाहर हिंदू वेश-भूषा में आती हैं। यहाँ का जनमानस उनके सिंदूर खेला को ही असली मान बैठा था, मगर उसे नहीं पता था कि उसकी पवित्र भावनाओं के साथ खेला हो रहा है।
तुर्की में जाकर शादी करना जरूर और परेशान करता है, जिसके जबाव भी शायद समय पर सामने आयें। अभी तो नुसरत से यह प्रश्न करने का समय है कि यदि वह केवल लिव-इन था तो मुख्यमंत्री क्यों इस लिव-इन को बधाई देने आयी थीं? क्या वे चाहती थी कि बच्चे हमारे लिव-इन सीखें?
प्रश्न बहुत है, परंतु उत्तर केवल नुसरत जहां और अंत में समय के पास ही हैं।
(देश मंथन, 10 जून 2021)

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