अफ्रीका जा कर चीन को घेरने की रणनीति

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अफ्रीकी महाद्वीप में शामिल देशों में तीन मुख्य आर्थिक केंद्र हैं, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया और केन्या। प्रधानमंत्री के दौरे में इसमें से दो देश शामिल हैं। अन्य देश संसाधन बहुल हैं जिनका विकास नहीं हुआ है। अमूमन हर अफ्रीका देश में चीन के व्यापक आर्थिक हित हैं जहाँ उसे किसी अन्य देश से कोई खास चुनौती नहीं है। इनमें मोजाम्बिक और तंजानिया शामिल हैं।

आम तौर पर जब कोई विकसित या विकासशील देश के प्रमुख का दौरा अफ्रीकी महाद्वीप के अविकसित देशों में होता है तो उसका मंतव्य वहाँ के संसाधनों से आर्थिक लाभ लेने का होता है। अन्य विकसित देश जब इन देशों के विकास में मदद करते हैं तो मानवाधिकार, लोकतंत्र से लेकर तमाम शर्तें लागू होती हैं। चीन का ध्यान इन शर्तों पर कम ही रहता है। इससे इन देशों के लिए चीन मुफीद रहता है।

उपभोक्ता वस्तुओं के मामले में तो भारत फिलहाल चीन से पिछड़ा है लेकिन बुनियादी ढाँचे के विकास में भारतीय एजेंसियों की प्रतिष्ठा चीन के मुकाबले बेहतर है। चीन जब कोई विकास कार्य कराता है तो वह इंजीनियर से लेकर मजदूर तक अपने देश से लाता है और नियत समय में विकास कार्य करा देता है। लेकिन इससे इन अफ्रीकी देशों के लोगों को रोजगार नहीं मिलता जो उनके लिए नकारात्मक बात है। इसके अलावा चीन के कराये गये विकास कार्य टिकाऊ नहीं होते हैं। इसका उदाहरण हाल ही में केन्या में मिला जब चीन द्वारा बनवाया गया एक अस्पताल उद्घाटन के दिन ही ढह गया। इसके मुकाबले भारत जिस किसी देश में बुनियादी ढाँचा विकसित करता है, उसमें वहाँ के स्थानीय लोगों को रोजगार देता है और विकास कार्य में थोड़ा-बहुत विलंब भले हो, वह टिकाऊ होता है। यानी अफ्रीकी देशों में बुनियादी ढाँचा क्षेत्र में विकास कार्यों के मामलों में भारत चीन को सीमित करने की राह पर है।

इस यात्रा का कूटनीतिक मंतव्य भी है। दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्स में शामिल है जिसमें चीन एक महत्वपूर्ण स्थिति में है। दक्षिण अफ्रीका ने एनएसजी पर भले भारत का समर्थन किया हो लेकिन कहीं न कहीं उसे चीन के प्रभाव में समझा जाता है। मोदी की यात्रा से दक्षिण अफ्रीका और भारत के संबंधों में और गर्मी आयेगी और ब्रिक्स समेत सभी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा केन्या भारत की तरह आतंकी हमलों की चपेट में रहा है। इस यात्रा से आतंकवाद के मसले पर भारत को केन्या को भरपूर साथ मिल सकेगा जिससे पाकिस्तान पर लगाम लगेगी। एनएसजी प्रकरण ने बताया है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनय के मोर्चे पर छोटे से छोटे देश का अपना महत्व है। इस दृष्टि से देखें तो मोदी की इस यात्रा से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रभाव बढ़ेगा, आर्थिक हित जो सधेंगे, वह तो सधेंगे ही।

(देश मंथन 09 जुलाई 2016)