फिर से चर्च में यौन स्कैंडल और फिर से चुप्पी!

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हालाँकि अब निथिराविलाई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हो गया है और आरोपी जेल में है। यह ठीक है कि मामला दर्ज हो गया है, पर प्रगतिशीलों की वाल पर शांति है। मंदिर के भक्त की किसी गलत हरकत पर मंदिर को कोसने वाली प्रगतिशील जमात पादरी के ही सेक्स स्कैंडल में पकडे जाने पर चुप है, कोई हल्ला नहीं है।

दानिश सिद्दीकी की तालिबान द्वारा हत्या पर वामदलों की चुप्पी ही ऐसा मुद्दा नहीं है, जो उनकी एकतरफा पक्षधरता को उकेरती है। अभी कुछ दिनों पहले एक ऐसी घटना हुई, जो किसी भी हिंदू मंदिर में हुई होती तो अब तक सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया होता, क्रांतिकारी फेमिनिस्ट कविताएँ लिखने लगतीं, मंदिरों के ऊपर कार्टून बनने लगते और फिर जो होता, हम सभी जानते हैं।
हुआ यह कि तमिलनाडु के कन्याकुमारी में चर्च की आड़ में सेक्स रैकेट चल रहा था। बुधवार 14 जुलाई 2021 को खबर आयी कि तमिलनाडु पुलिस ने कन्याकुमारी जिले के एसटी मगंडू इलाके में ज्योति नगर में स्थित ड्युसिस ऑफ क्राइस्ट एंग्लिकन चर्च ऑफ इंडिया से संबंधित फेडरल चर्च ऑफ इंडिया में छापा मारकर कुछ लोगों को सेक्स रैकेट चलाने के आरोप में हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि जिसे हिरासत में लिया गया है, वह और कोई नहीं बल्कि चर्च का पादरी लाल एस. एन. शाइन ही था। उसके साथ चार महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया।
पुलिस को यह सूचना मिली थी कि इस चर्च में कई पुरुष और महिलाएँ बड़ी-बड़ी लग्जरी कारों में आते थे। जब पुलिस ने छापा मारा तो पता चला कि वहाँ पर सेक्स रैकेट चलता है और यह आरोप खुद पुलिस की पूछताछ में आरोपित पादरी ने स्वीकार कर लिया है कि वे लोग चर्च की आड़ में यह रैकेट चलाते हैं। पुलिस ने एक 19 वर्ष की लड़की को भी पकड़ा है, और फिर यह पता चला कि उस लड़की की माँ ने ही उसे देह व्यापार में धकेला है।
हालाँकि अब निथिराविलाई पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हो गया है और आरोपी जेल में है। यह ठीक है कि मामला दर्ज हो गया है, पर प्रगतिशीलों की वाल पर शांति है। मंदिर के भक्त की किसी गलत हरकत पर मंदिर को कोसने वाली प्रगतिशील जमात पादरी के ही सेक्स स्कैंडल में पकडे जाने पर चुप है, कोई हल्ला नहीं है। बल्कि प्रगतिशील जमात भारत के दक्षिणपंथियों को यह कहते हुए कोस रही है कि वह दानिश सिद्दीकी की मौत पर दुखी क्यों नहीं हैं? उन्हें यह नहीं दिख रहा है कि वह खुद को इंडियन मुस्लिम मानता था और उसके लिए उसका मजहब देश से पहले था।
भारत का आम नागरिक, जिसे केवल अपने धर्म और देश से प्यार है, वह इन कथित बुद्धिजीवियों की दोनों ही मामले में बेशर्म चुप्पी पर हैरान है। पर लोग जब इस चुप्पी पर प्रश्न उठाते हैं, तो खुद को सेकुलर-लिबरल कहने वाले उन्हें संघी कह कर या भारतीय तालिबान कह कर चुप कराने की कोशिश करते हैं। पर फिर भी वे सेकुलर-लिबरल यह नहीं बता पाते हैं कि आखिर उन्हें दानिश सिद्दीकी की हत्या करने वालों का नाम और उस सोच का नाम लेने में क्या परेशानी है, जिसके कारण दानिश की मौत हुई।
इसी के साथ पीछे से फादर मुलुक्क्ल के खिलाफ आवाज उठाने के कारण सिस्टर लूसी को वेटिकन ने दोषी ठहरा दिया है और सिस्टर लूसी ने अब न्यायालय से गुहार लगायी है कि उन्हें कम-से-कम कॉन्वेंट में रहने दिया जाये। सिस्टर लूसी भी चर्च और सेक्स स्कैंडलों के बीच चुप रह सकती थीं, पर उन्होंने आवाज उठाना उचित समझा। और आवाज उठाने का दंड उन्हें यह मिला है कि कथित फेमिनिस्ट महिलाएँ भी उनके लिए आवाज नहीं उठा रही हैं।
चर्च में होने वाले सेक्स स्कैंडलों से लिबरलों को इतनी सहानुभूति क्यों है? यह प्रश्न अनुत्तरित है!
(देश मंथन, 20 जुलाई 2021)

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