नीरज चोपड़ा की जीत पर लिबरल समाज दुखी क्यों हुआ?

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Neeraj Chopra with PM Narendra Modi

वामपंथियों को नीरज चोपड़ा से ही इतनी नफरत क्यों हो रही है? वह इसलिए क्योंकि नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू जैसे लोग उनके वह मिथक तोड़ रहे हैं, जो वह इतने वर्षों से गढ़ते हुए आ रहे थे।

जैसे ही नीरज चोपड़ा द्वारा भाला फेंकने की प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण जीतने का समाचार भारत में आया, वैसे ही भारत में खुशी की लहर दौड़ गयी। आखिर इतने वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हुई थी और भारत की झोली में एथलेटिक्स में पदक आया था। पूरी दुनिया में बैठे भारतवासी जैसे इसी क्षण की प्रतीक्षा में थे। सुनील गावस्कर जैसे खिलाड़ी भी इस अवसर पर पूरी रौ में नजर आये, उन्होंने जम कर नृत्य भी किया और उनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर छा गये।
पर एक वर्ग ऐसा था, जो दुखी था। वह वर्ग दुखी क्यों था? यह समझ से बाहर था। वह विशेष कर नीरज चोपड़ा की जीत पर दुखी था।
यहाँ तक कि वे लोग खुल कर नीरज चोपड़ा के विरोध में भी उतर आये। दरअसल नीरज चोपड़ा द्वारा भाला फेंक प्रतिस्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतते ही लोगों ने उनके पुराने ट्वीट साझा करना शुरू कर दिये थे कि कैसे वे प्रधानमंत्री के समर्थक हैं और कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका साथ दिया था। वे लोग यह बताते गये कि कैसे नीरज संघी है और क्यों उसका विरोध करना चाहिए था और कैसे उनका सारा समय एक संघी का समर्थन करने में चला गया।
नीरज चोपड़ा ने दरअसल उस विशाल जूद के लिए समर्थन का आह्वान किया था, जिस विशाल को खालिस्तानियों ने ऑस्ट्रेलिया में तरह-तरह की धाराएँ लगवा कर जेल में डलवाया हुआ है। उसी का उल्लेख करते हुए एक व्यक्ति ने ट्विटर पर लिख दिया कि जो भी सफल भारतीय खिलाडी है, वह हिंदुत्व से जुड़ा हुआ आतंकी ही होता है। यहाँ पर हमारे गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा ऑस्ट्रेलिया में सिखों पर हमला करने के लिए हिरासत में लिए गये संघी विशाल के लिए समर्थन की गुहार लगा रहे हैं। संघी खुश होने का एक भी मौक़ा नहीं देते हैं।
और भी कई वामपंथियों ने विरोध किया। कुछ का रोना इसलिए था कि पाकिस्तान का खिलाड़ी हार गया। एक पत्रकार ने तो यहाँ तक ट्वीट कर दिया था कि क्या अरशद नदीम, नीरज चोपड़ा के साथ वही कर सकता है जो जावेद मियाँदाद ने भारतीय टीम के साथ किया था? अर्थात् अंतिम समय पर वह नीरज को हरा दे। हालाँकि वह ट्वीट डिलीट कर दिया गया, पर वह एक प्रश्न छोड़ गया। ऐसे ही सी. उदय भास्कर ने भी अरशद नदीम की तारीफ़ करते हुए ट्वीट किया कि आपने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया, और आप टॉप खिलाड़ियों में रहे! शाबास!
अब आते हैं कि वामपंथियों को नीरज चोपड़ा से ही इतनी नफरत क्यों हो रही है? वह इसलिए क्योंकि नीरज चोपड़ा और मीराबाई चानू जैसे लोग उनके वह मिथक तोड़ रहे हैं, जो वह इतने वर्षों से गढ़ते हुए आ रहे थे। उनकी दृष्टि में हिन्दू स्त्रियाँ हमेशा ही दबी कुचली, रोती हुई होती हैं, जबकि ऐसा होता नहीं है। वामपंथी लेखन को छोड़ कर कहीं भी हिन्दू स्त्री सहज रोती हुई नहीं मिलेगी, जो लव जिहाद में फँस कर रोती भी हैं, उन तक इनकी आवाज़ नहीं पहुँचती है।
तो मीराबाई चानू उस छवि को तोड़ती है और उसके साथ ही नीरज चोपड़ा और रवि दहिया जैसे युवक, हिंदू युवक की उस छवि को तोड़ते हैं, जो ये लोग इतने वर्षों से बना रहे थे। आप सोच कर देखिये कि इन्हें स्वतंत्र सोच, आकर्षक देहयष्टि वाले व्यक्तियों से क्या समस्या हो सकती है? दरअसल यही जो संयोजन है, वह उन्हें परेशान कर रहा है। उन्होंने पान खाते हुए, भगवा अंगोछा गले में डाले हुए और गाली देते हुए एक युवक की तस्वीर अपनी कहानियों, फिल्मों और ओटीटी के माध्यम से बना दी थी, और अब आकर वह तस्वीर टूट रही है। उसे नीरज चोपड़ा जैसे लड़के तोड़ रहे हैं और समाज के सामने आदर्श बन रहे हैं।
जबकि वह इतने वर्षों से हिंदू लड़कों के पौरुष को समाप्त करने के लिए अभियान चला रहे थे, जैसे हाल ही में हमने लिपस्टिक फॉर आल देखा था। वे लोग लड़कियों के स्त्री गुण एवं पुरुषों का पौरुष समाप्त करने का अभियान चला रहे हैं, और उन्हें यूनिवर्सिटी आदि में सफलता मिल रही थी, मगर नीरज और रवि दहिया, मीराबाई चानू और पीवी सिंधु जैसे खिलाड़ियों की जीत उनके इस अभियान में बाधक है। नीरज चोपड़ा तो भाला फेंकने में जीते हैं, अर्थात् पौरुष का एक बड़ा प्रतीक!
युधिष्ठिर को सबसे महान भाला फेंकने वाला माना जाता है। जब लोग भाला चलाना सीखेंगे तो स्वत: ही लोगों के मन में अपने इतिहास की ओर जाने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और जब वे अपने इतिहास में जायेंगे तो वे खुद वह सब कुछ सीखने की कोशिश करेंगे जो वामपंथियों के नैरेटिव में आकर विकृत हो चुका है और फिर वह सत्य जानेंगे।
और वामपंथियों को सत्य से घृणा है। उन्हें स्त्री के स्त्रीत्व और पुरुषों के पौरुष से घृणा है। इसलिए उन्हें नीरज चोपड़ा जैसे युवकों से घृणा है!
(देश मंथन, 25 अगस्त 2021)

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