भारत का कानून न मानने की औपनिवेशिक जिद

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(चित्र कार्ल रॉक के वीडियो से साभार)

कार्ल रॉक एक विदेशी है, जो टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। उसने हरियाणा में शायद एक राजनीतिक परिवार में शादी की है। वह यहाँ वीडियो बना कर यूट्यूब पर डाल करके पैसे भी कमा रहा है। पर वह एक और काम कर रहा था। वह भारत की चुनी हुई सरकार का विरोध कर रहा था।

इन दिनों लेफ्ट-लिबरलों में न्यूजीलैंड के एक यूट्यूबर कार्ल रॉक को लेकर बहुत शोर मचा रहे हैं कि उसकी शादी यहाँ हुई है और भारत सरकार ने उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया है। कुछ बहुत लोकप्रिय यूट्यूबर भी उसके अधिकार के लिए आवाज उठा रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि भारत सरकार विरोध की आवाज कुचल रही है। अब यहाँ पर पेच आता है, किसके विरोध की?
कार्ल रॉक एक विदेशी है, जो टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था। उसने हरियाणा में शायद एक राजनीतिक परिवार में शादी की है। वह यहाँ वीडियो बना कर यूट्यूब पर डाल करके पैसे भी कमा रहा है। पर वह एक और काम कर रहा था। वह भारत की चुनी हुई सरकार का विरोध कर रहा था।
यही वह मुद्दा है, जो इस सरकार के विरोधी उठा रहे हैं और यही दलील वह भी न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री को दे रहा है। मगर असली कारण कुछ और ही है। असली कारण जो हैं, उस पर ये लिबरल नहीं बोलेंगे! दरअसल कार्ल है तो न्यूजीलैंड का नागरिक, मगर उसने अपनी पत्नी के साथ नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) विरोधी आंदोलन में भाग लिया था। क्या एक विदेशी नागरिक किसी देश के आतंरिक मुद्दों में हस्तक्षेप कर सकता है? क्या एक विदेशी नागरिक किसी देश के आतंरिक विषय में हुए किसी आंदोलन में भाग ले सकता है?
नहीं! तो क्या सीएए विरोधी आंदोलन में भाग लेने के कारण और सरकार की आलोचना करने के कारण ही कार्ल इन विपक्षियों के प्रिय हैं? यह एक प्रश्न उभर कर आया है। इसी के साथ कार्ल का एक वीडियो और प्रचारित हो रहा है, जिसमें वह दिल्ली मेट्रो के भीतर एक वीडियो बना रहा है। जब उसे एक भारतीय टोकता है कि वह ऐसा न करे, तो वह उसे ही धमकाता है। वह व्यक्ति उससे कह रहा है कि दिल्ली मेट्रो के परिसर में मेट्रो के नियम का पालन करें, तो कार्ल ने यह कहते हुए वीडियो अपने यूट्यूब पर अपलोड किया कि उस व्यक्ति ने कार्ल को परेशान किया।
क्या अपने देश के पक्ष में बोलना अपराध है? क्या अपने देश के पक्ष में किसी को टोकना परेशान करना है? नहीं? तब तो और भी नहीं, जब वह व्यक्ति दुश्मन देश पाकिस्तान का प्रेमी है और बार-बार पाकिस्तान जाकर पाकिस्तान की मेजबानी के गुण गाता है। कार्ल का पाकिस्तान प्रेम और भारत के आतंरिक मामलों में दखल देना उसके यूट्यूब चैनल पर अक्सर दिख जाता है।
क्या कार्ल को यह नहीं पता था कि दिल्ली मेट्रो में किसी भी तरह की फिल्म बनाने की अनुमति नहीं है? और वह भी तब, जब वह कहता है कि वह वर्ष 2017 से भारत में है?
कार्ल के पास यूट्यूब चैनल के माध्यम से न जाने कहाँ-कहाँ की फुटेज है, तो ऐसे में जब वह नागरिकता कानून के विरोध में भारत सरकार विरोधी रुख दिखा चुका है तो क्या उस पर प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए था?
दरअसल ये ऐसे लोग हैं, जो अपने कथित रूप से विकसित होने पर गर्व करते हैं और भारत को अभी भी औपनिवेशिक दृष्टि से देखते हैं। वे चाहते हैं कि वे भारत में चाहे कुछ भी करते रहें, उन पर कोई उंगली न उठाये! पर भारत अपने कानून से चलता है और कानून के हिसाब से सरकार को कार्ल को उचित ही प्रतिबंधित किया है!
पर सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि कब ये यूरोपीय लोग भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में देखना शुरू करेंगे?
(देश मंथन, 13 जुलाई 2021)

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