झूठ के सहारे हिंदुओं को असहिष्णु दिखाने की कोशिश

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देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की घटनाओं की खबर आती है और उसमें जोड़ दिया जाता है बाद में कि इस कारण से घटना हुई। उस घटना का जय श्रीराम के नारे से कोई संबंध नहीं होता, लेकिन जोड़ा जाता है। कांग्रेस से लेकर तमाम विपक्षी दल इस तरह की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं, इस तरह के मुद्दे या विचार को खड़ा करना चाहते हैं।
तो षड़यंत्र क्या है? षड़यंत्र दो तरह के हैं।

गाजियाबाद की एक घटना में कहा गया कि एक बहत्तर साल के बुजुर्ग मुसलमान की दाढ़ी काट दी गयी, मारा-पीटा गया और उससे जय श्रीराम का नारा जबरन बुलवाया जा रहा था। यह खबर बहुत प्रमुखता से छपी। मीडिया का एक वर्ग हमेशा ऐसी खबरों की तलाश में रहता है, बल्कि इंतजार में रहता है। ट्विटर, सोशल मीडिया और अखबारों में सब जगह यह खबर चलने लगी। उस पर प्रतिक्रियाएँ भी आने लगीं। लेकिन यह अकेली घटना नहीं है। इसमें एक रुझान दिखेगा और इसके पीछे दो तरह के षड़यंत्र दिखेंगे।
इस घटना में पुलिस ने जब जाँच शुरू की तो पता चला कि यह आरोप पूरी तरह से झूठा है। उस बुजुर्ग की पिटाई में तीन लोग शामिल थे, उनमें एक हिंदू लड़का था और दो मुसलमान। पिटाई इसलिए हुई कि वह ताबीज देता था। इन लोगों का आरोप था कि वह ताबीज असर नहीं कर रही थी। उससे जय श्रीराम बुलवाने की कोशिश का आरोप बिल्कुल झूठा निकला। वैसे भी अगर दो मुस्लिम लड़के पिटाई में शामिल थे, तो वे जय श्रीराम का नारा उससे क्यों लगवायेंगे?
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इन तीनों को गिरफ्तार करने के बाद इस मंगलवार को एफआईआर दर्ज किया। एफआईआर दर्ज हुई ट्विटर के खिलाफ। ट्विटर के खिलाफ एफआईआर इसलिए हुई कि इस घटना का जोर-शोर से प्रचार हुआ और ट्विटर पर यह खबर वायरल हुई। पुलिस का स्पष्टीकरण आने और इस घटना लगा आरोप गलत होने की बात मालूम होने के बाद भी ट्विटर ने हटाया नहीं इसको।
भारत सरकार ट्विटर और सारे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लगातार कहती रही है कि इंटरमीडियरी के दर्जे का मतलब यह है कि आप एक संदेशवाहक हैं। हमने आपको संदेश भेजा, आपको संदेश पहुँचा। मैंने अगर उसमें कुछ गैरकानूनी काम किया तो उसके लिए मैं जिम्मेदार हूँ, या आपने आगे उस पर कुछ किया है तो आप हैं, इंटरमीडियरी की भूमिका निभाने वाला ट्विटर या कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म उसका जिम्मेदार नहीं होगा। यह उसी तरह से है जैसे खत में क्या लिखा है, इसके लिए डाकिया जिम्मेदार नहीं है।
यह दर्जा उन्हें ज्यादातर देशों में मिला हुआ है। इससे उन्हें कानून का संरक्षण प्राप्त होता है कि आपके प्लेटफॉर्म पर जो खबर चली, उसके कारण आप पर मुकदमा नहीं हो सकता है। लेकिन जैसे ही आप उसमें फेरबदल करते हैं, उसमें कुछ जोड़ते हैं या हटाते हैं, उस कोई टिप्पणी करते हैं, तो फिर आप इंटरमीडियरी के बदले प्रकाशक (पब्लिशर) बन जाते हैं। प्रकाशक के लिए कानून अलग है, जिसमें आप पर मुकदमा हो सकता है।
भारत सरकार आईटी ऐक्ट में हुए संशोधन के तहत कह रही थी कि अगर आप ये ये कदम नहीं उठायेंगे तो आईटी ऐक्ट की धारा-79 में मिली सुरक्षा खत्म हो जायेगी। पर ट्विटर हीला-हवाली करता रहा। 26 मई उसकी अंतिम तारीख थी, पर वे उसके बाद भी समय माँगते रहे, जबकि बाकी प्लेटफॉर्म ने इन नियमों का पालन किया है। इसके चलते इस मंगलवार को भारत सरकार ने ट्विटर का इंटरमीडियरी दर्जा यानी कानूनी सुरक्षा खत्म करने का निर्णय कर लिया। इसके बाद ट्विटर के खिलाफ पहली एफआईआर उत्तर प्रदेश पुलिस ने दर्ज की है।
दूसरे, इस वायरल झूठ को प्रचारित-प्रसारित करने वालों के खिलाफ भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है। इसमें वायर नाम की एक ऑनलाइन मीडिया संस्था है। एक और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाने वाले मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एफआईआर हुई है। कांग्रेस के नेता सलमान निजामी, शमा मोहम्मद के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है। एक-दो पत्रकारों के खिलाफ भी हुई है। राणा अयूब जो अपने को पत्रकार कहती हैं पर दरअसल खाली जेहादी माहौल बनाने और इस तरह का प्रचार करने की ही उनकी पहचान बन गयी है, उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई है।
जय श्रीराम को बदनाम करने का यह कोई पहला मामला नहीं है। एक ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म ऑपइंडिया ने 19-20 ऐसी घटनाएँ बतायी हैं कि कैसे फर्जी तरीके से इन घटनाओं में किसी मुसलमान को मार-पीट कर उससे जय श्रीराम कहलवाने के आरोप लगाये गये। हरियाणा के मेवात के आसिफ खान की हत्या के मामले में यही हुआ। तेलंगाना में एक भैंसा मस्जिद की दीवार पर जय श्रीराम के नारे लिख दिये गये और यह हल्ला हुआ कि इसे हिंदुओं ने लिखा है, यह दंगा भड़काने की कोशिश है। जब तेलंगाना पुलिस ने जाँच की तो मालूम हुआ कि मुहल्ले में रहने वाले दो मुसलमान युवकों ने यह काम किया था। उनमें एक नाबालिग था, जिससे लिखवाया गया। जिसने लिखवाया, वह बालिग था। उनके खिलाफ कार्रवाई हुई। यह मामला पूरी तरह से झूठा निकला। लेकिन इसका देश-विदेश में प्रचार हुआ।
जब इस तरह की कोई भी घटना होती है तो उस पर प्रतिक्रिया के लिए जैसे कुछ लोग इंतजार में बैठे रहते हैं। गाजियाबाद वाली घटना के बाद एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हिंदू गुंडों ने उस बुजुर्ग की पिटाई की और उससे जबरदस्ती जय श्रीराम बुलवाने की कोशिश की। इसी तरह से और भी ट्विटर हैंडल से प्रतिक्रिया देने वाले नेताओं का एक खास वर्ग बन गया, जो इस तरह की घटनाओं को इस रूप में पेश करने की कोशिश करता है, बिना यह जाने कि सच्चाई क्या है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की घटनाओं की खबर आती है और उसमें जोड़ दिया जाता है बाद में कि इस कारण से घटना हुई। उस घटना का जय श्रीराम के नारे से कोई संबंध नहीं होता, लेकिन जोड़ा जाता है। कांग्रेस से लेकर तमाम विपक्षी दल इस तरह की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं, इस तरह के मुद्दे या विचार को खड़ा करना चाहते हैं।
तो षड़यंत्र क्या है? षड़यंत्र दो तरह के हैं। एक, जय श्रीराम के नारे को सांप्रदायिक रंग दे दिया जाये। बहुत-से लोग कहने भी लगे हैं कि यह हिंदुओं की ओर से युद्ध का उद्घोष है। एक पवित्र नारे को किस तरह से बदनाम करने की कोशिश हो रही है। दूसरी कोशिश यह बताने की है कि हिंदू बहुत ही असहिष्णु है, दूसरे धर्म के लोगों को बर्दाश्त नहीं करता। यह बात कहने के लिए आपके अंदर झूठ का बहुत बड़ा लावा होना चाहिए। आप कैसे इस तरह का झूठ बोल सकते हैं?
अगर हिंदू असहिष्णु होता तो भारत ऐसा देश नहीं होता जहाँ सबसे ज्यादा धर्म के लोग रहते हैं, और यह बात कोई 10-20-50 साल की नहीं है। यह हजारों साल से चल रहा है। जब से दूसरे धर्म यहाँ आये हैं, तब से हिंदू धर्म के लोगों ने न तो कोई विस्तारवादी रुख दिखाया, न कभी आपने सुना होगा कि पूरे इतिहास में कि कभी हिंदुओं ने किसी दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्म में शामिल करने की कोशिश की। बाकी सब धर्मों के बारे में आपको ऐसा मिल जायेगा। हिंदू से ज्यादा सहिष्णु लोग दुनिया में किसी और धर्म में नहीं हैं। दूसरी बात कि हिंदू धर्म पैदा नहीं हुआ, यह सनातन है। क्या आपमें से कोई बता सकता है कि हिंदू धर्म का संस्थापक कौन है?
ऐसा नहीं है कि यह फर्क इन लोगों को पता नहीं है। लेकिन इन लोगों के विचार (नैरेटिव) में यह फिट नहीं बैठता। इनकी कोशिश यह है, खास कर पिछले सात साल से जब केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, तब से यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश हो रही है। सवाल यह है कि इसके पीछे आपकी मंशा क्या है? मंशा है इस देश की संस्कृति के खिलाफ, इस देश के खिलाफ षडयंत्र। षडयंत्र यह कि इस देश का बहुमत अपने धर्म को कमतर मानने लगे, हीन मानने लगे। यह काम अंग्रेज और उनके पहले के शासक मुगल कर चुके हैं, जिससे हम अपनी संस्कृति और भाषा को लेकर, अपनी वेश-भूषा को लेकर एक तरह से कमतर महसूस करते हैं। एक हीन-ग्रंथि का शिकार हैं कि जो भारतीय है, वह पुरातनपंथी है, वह दकियानूसी है, रूढ़िवादी है। अब हिंदुओं को असहिष्णु दिखाने की भरपूर कोशिश हो रही है।
(आपका अखबार यू-ट्यूब चैनल पर रखे गये विचारों की संक्षिप्त प्रस्तुति)
(देश मंथन, 17 जून 2021)

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