आईपीएल फाइनल में स्पिनर दिखायेंगे कमाल

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8 टीमों, 15 शहरों और 69 मैचों और सभी उतार-चढ़ावों के सफर के बाद अब क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें कोलकाता के ईडन गार्डन में इन दोनों टीमों के बीच खेले जाने वाले मैच टिकी है जहाँ विजेता की ताजपोशी होगी।

इस बार आईपीएल काफी रोमांचक रहा। शुरुआती चरण में सबसे नीचे रहने के बाद भी मुंबई फाइनल में पहुँचने वाली पहली टीम बनी। अपने शुरुआती 5 मैच हारने के बाद दर्शकों ने इस टीम से आस छोड़ दी थी। रिकी पॉन्टिंग, सचिन तेंदुलकर, अनिल कुंबले और जॉन्टी रोड्स जैसे भारी कोचिंग दल पर सवालिया निशान लग गये थे। प्लेइंग इलेवन में अधिक बदलाव, चोटिल खिलाड़ी, मलिंगा की खराब फॉर्म और सलामी जोड़ी की नियमित असफलता के चलते मुंबई की राह और कठिन हो गयी।

लेकिन लय में आने के बाद मुंबई ने ऐसा खेल दिखाया कि सारी टीमें दंग रह गयीं। ऐरॉन फिंच के चोटिल होने पर शामिल हुए लेंडल सिमंस ने पार्थिव पटेल के साथ मिल कर टीम को एक स्थिर और मजबूत शुरुआत दिलायी। दोनों ने 8 मैचों में 600 से अधिक रन जोड़े। नौजवान हार्दिक पांड्या ने भी ऑलराउंडर कोरी एंडरसन की कमी नहीं खलने दी और मौका मिलने पर गेंद और बल्ले, दोनों से जौहर दिखाये। कप्तान रोहित शर्मा और केरॉन पोलार्ड तो हमेशा ही टीम के मजबूत स्तंभ रहे हैं। शुरुआती दौर में ढीले रहे लसिथ मलिंगा ने फॉर्म में वापसी करके आलोचकों को मुँहतोड़ जवाब दिया। उनका बखूबी साथ दिया 30 लाख में खरीदे गये तेज किवी गेंदबाज मिचेल मैकलेनघन ने।

वहीं दूसरी तरफ है आईपीएल इतिहास की सबसे सफल टीम चेन्नई सुपर किंग्स ने लीग दौर में शानदार प्रदर्शन किया। 14 में से 9 मैच जीत कर टीम पहले पायदान पर रही। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में चेन्नई ने हर वर्ष आईपीएल के अन्तिम चार में जगह बनायी है। हालाँकि पहले ही क्वालिफाइंग मुकाबले में टीम मुंबई से हार गयी, लेकिन 22 मई को रांची में हुए दूसरे क्वालिफायर में चेन्नई ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 3 विकेट से शिकस्त देकर फाइनल में प्रवेश किया।

चेन्नई टीम की खासियत है कि इस टीम में ज्यादा बदलाव नहीं किये जाते। कागजों पर संतुलित औऱ सशक्त दिखने वाली इस टीम का प्रदर्शन भी असाधारण ही रहा है। ब्रेंडन मक्कुलम और ड्वेन स्मिथ ने टीम को ठोस शुरुआत दी, तो सुरेश रैना और फैफ डू प्लेसी ने मध्य क्रम सँभाला। मैदान पर शान्त दिखने वाले कप्तान धोनी ने अपना जलवा दिखाया।

ऑलराउंडर ब्रावो ड्वेन और आशीष नेहरा ने लगभग 40 विकेट लेकर विरोधियों के परखच्चे उड़ा दिये। मोहित शर्मा, ईश्वर पान्डे और पवन नेगी ने मौका मिलने पर काफी प्रभाव छोड़ा। रविन्द्र जडेजा का फीका प्रदर्शन टीम के लिए चिन्ता का सबब बना रहा। रैना, डु प्लेसी, मक्कुलम, जडेजा और ब्रावो के विश्वस्तरीय क्षेत्ररक्षण के कारण यह टीम विरोधियों पर दबाव डाल देती है। लेकिन लीग दौर के बाद वापस लौट चुके ब्रेंडन मक्कुलम की कमी टीम को बल्लेबाजी में जरूर खलेगी।

फाइनल मुकाबला इन दोनों चिर प्रतिद्वंदियों के बीच ईडन गार्डन में खेला जायेगा। इस मैच में दोनों कप्तान शायद टॉस जीत कर लक्ष्य का पीछा करना चाहेंगे। ईडन गार्डन की पिच काफी धीमी है। इस विकेट पर गेंद थोड़ा रुक कर आती है। ऐसे में स्पिनरों की भूमिका अहम हो जाती है। खास तौर पर रविचंद्रन अश्विन और हरभजन सिंह। दोनों ही ऑफ स्पिनर अपनी टीम में स्पिन विभाग संभाले हुए हैं। साथ ही रविंद्र जडेजा और जगदीश सुचित की भूमिका भी अहम हो जाती है।

लेकिन रोहित शर्मा के मन में एक द्वंद हो सकता है विनय कुमार को लेकर। विनय कर्नाटक के रणजी कप्तान हैं और उनके पास कोलकाता में खेलने का खासा अनुभव भी है। लेकिन अभी तक वे आईपीएल में कोई कमाल नहीं दिखा पाये हैं। वही स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने अभी तक एक भी मैच नहीं खेला है। ऐसे में टीम प्रबंधन के लिए कला और अनुभव में से किसी एक को चुनना कठिन हो सकता है।

दोनों टीमों के बीच हुए 23 मैचों में काँटे की टक्कर में 12 मैच जीत कर मुंबई के पास मनोवैज्ञानिक बढ़त है। वहीं चेन्नई भी 11 मैच जीत कर ज्यादा पीछे नहीं है। एक तरफ चेन्नई सुपर किंग्स कागजों पर ज्यादा मजबूत नजर आती है तो वहीं पहले क्वालिफायर मैच में खुद चेन्नई से ही जीत कर मुंबई के हौसले बुलंद है। इसलिए दोनों में से किसी भी टीम को कम नहीं आँका जा सकता और दर्शक एक रोमांचक फाइनल की उम्मीद कर रहे हैं।

(देश मंथन, 23 मई 2015)

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