उत्तर प्रदेश चुनाव : हार-जीत के बाद क्या?

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हरिशंकर राय, सह-प्राध्यापक : 

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के परिणाम से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाली है।  

यदि वह पहले या दूसरे नंबर पर नहीं आयी तो अगले लोकसभा चुनाव में और फिर आगे भी इसका भविष्य घोर अंधकार में होगा। समाजवादी पार्टी (सपा) अगर पहले नंबर पर रही तो अखिलेश यादव के पास मौका रहेगा कि वे जातीय गिरोहवाजी और खराब कानून-व्यवस्था की छबि से बाहर निकल कर एक अच्छे प्रशासक और युवा जननेता के रुप में अपने को स्थापित करें। 

अगर सपा दूसरे नंबर पर रही तो परिवारिक झगड़े में कड़ी टक्कर होगी और कड़े संघर्ष के बाद लोकसभा के चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करना इसके राजनीतिक भविष्य के लिए जीवन-मरण की स्थिति जैसा होगा। अगर यह तीसरे स्थान पर फिसल गयी तो यह शिवपाल यादव वाली सपा की अपनी परंपरागत छवि में वापस लौटेगी और अखिलेश भी शिवपाल बनने को विवश हो जायेगें। 

अगर भाजपा नंबर वन रहती हैं तो मोदी के पास अवसर होगा कि बढ़े हुए आत्मविश्वास एवं राज्यसभा में मजबूत स्थिति का देश की बेहतरी के लिए उपयोग करके लोकसभा के चुनाव तक कुछ ठोस करके दिखा सकें। लेकिन अगर उन्होंने कुछ असाधारण नहीं किया तो उत्तर प्रदेश विधानसभा में जीतना लोकसभा के चुनाव में मोदी के लिए नुकसानदेह रहेगा और राज्य में 73 सीटों से फिसलन को 37 तक रोकना भी मुश्किल रहेगा।

अगर भाजपा दूसरे नंबर पर रहती हैं तो लोकसभा के चुनाव में उसके लिए यह फायदेमंद रहेगा और सपा या बसपा के दो साल के शासन से उपजा क्रोध फिर से भाजपा को लोकसभा चुनाव में एक बेहतर पसंद बना देगा। लेकिन अगर भाजपा तीसरे स्थान पर जाती है तो भाजपा का मनोबल इतना गिरेगा कि अगले लोकसभा में बहुमत तो नामुमकिन रहेगा।

(देश मंथन, 08 फरवरी 2017)

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