Tuesday, January 26, 2021

Rajeev Ranjan Jha

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डोनाल्ड ट्रंप लालायित हैं भारतीयों के समर्थन के लिए

राजीव रंजन झा : 

नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दोस्ती तस्वीरों के लिए अच्छी है। मोदी और बराक ओबामा की दोस्ती भी तस्वीरों के लिए बहुत अच्छी थी। और तस्वीरें तो मोदी के साथ शी जिनपिंग की भी बहुत अच्छी थीं।

कांग्रेस मुख-पत्र ने तो हद कर दी, सीधी अवमानना सर्वोच्च न्यायालय की

राजीव रंजन झा : 

श्रीराम जन्मभूमि विवाद पर इस देश में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से पहले वैसे तो सबने कसमें खायीं कि जो भी अदालत का फैसला होगा, उसे ही मानेंगे। लेकिन फैसला सामने आने के कुछ लोगों ने इसमें मीन-मेख निकालना भी शुरू कर दिया है।  

राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता का सवाल

राजीव रंजन झा

राहुल गांधी पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बेटे हैं। इस नाते वे स्वाभाविक रूप से भारत के ही नागरिक हुए। वे सोनिया गांधी के बेटे हैं। उनके जन्म के समय सोनिया गांधी इटली की नागरिक थीं। इस नाते इटली के कानूनों के अनुसार राहुल गांधी अपने-आप ही इटली की नागरिकता के पात्र बन जाते हैं। 

कौन चुनता है प्रधानमंत्री? सांसद, या जनता?

राजीव रंजन झा : 

इस देश की जनता सांसद चुनती है, प्रधानमंत्री नहीं। 

यही संविधान है ना!

क्या नेहरू ने चीन की मदद की सुरक्षा परिषद का सदस्य बनने में?

राजीव रंजन झा : 

वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक बयान से यह विवाद खड़ा हो गया है कि क्या चीन को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलवाने में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मदद की थी? 

आपको नहीं पता होगा मध्य प्रदेश में भाजपा की हार का यह कारण

राजीव रंजन झा : 

कल शाम रीवा के भँवर सिंह से बात होने लगी। उन्होंने जो सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प बात बतायी, वह इस टिप्पणी के अंत में है। वे यहाँ दिल्ली में चौकीदार का काम करते हैं। मैंने पूछा, वोट देने गये थे? 

क्यों फिर उल्टा पड़ गया कांग्रेस का दाँव

कांग्रेस अध्यक्षों की सूची 1947 से नहीं, 1978 से देखें...

राजीव रंजन झा : 

शशि थरूर कांग्रेस के नये मणिशंकर अय्यर बन गये हैं। वे अपनी समझ से तो भाजपा पर बहुत धारदार हमला करते हैं, पर भाजपा उनका फेंका हुआ हथगोला लपक कर वापस कांग्रेसी खेमे पर ही उछाल दे रही हैं।

चीन से दोस्ती नहीं, पर सहयोग संभव : जी. पार्थसारथी

पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिनों की चीन यात्रा ने एक तरफ जहाँ कूटनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी तो दूसरी ओर विपक्ष ने इस यात्रा को लेकर सवाल उठाये कि इससे हासिल क्या हुआ है? इस यात्रा के मायने क्या हैं और उससे भारत-चीन संबंधों की गाड़ी किस दिशा में बढ़ी है, यह समझने के लिए देश मंथन की ओर से राजीव रंजन झा ने बातचीत की भारत के पूर्व राजदूत जी. पार्थसारथी से।  

बस एक यह काम न करते जनरल रावत

राजीव रंजन झा : 

सेना प्रमुख अवैध घुसपैठ की बात करें और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से उसका विश्लेषण करें, यह बिल्कुल उचित है। लेकिन किन्हीं राजनीतिक दलों की सार्वजनिक चर्चा करना उनके लिए कतई उपयुक्त नहीं लगता।  

अब खुल रहा है पद्मावत पर सेक्युलरों का मोर्चा

राजीव रंजन झा : 

दरअसल संजय लीला भंसाली और उनकी फिल्म पद्मावत के खिलाफ मोर्चा तो छद्म सेक्युलरों का खुलना चाहिए था, पर करणी सेना का मोर्चा खुला होने के चलते छद्म सेक्युलर खुल कर अपनी बात कहनी कहने की जगह ही नहीं बना पा रहे हैं। मगर सेक्युलर मोर्चे से पद्मावत और भंसाली की कुछ-कुछ आलोचना सामने आने लगी है। 

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