Tuesday, October 19, 2021

प्रदीप सिंह

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लगभग चार दशकों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक प्रदीप सिंह इस समय 'आपका अखबार' नाम से यू-ट्यूब चैनल के संपादक हैं। उन्होंने अपने पत्रकारीय जीवन का आरंभ 1983 में स्वतंत्र भारत, लखनऊ से किया था। इसके बाद उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस, संडे ऑब्जर्वर, जनसत्ता, सम्यक कम्युनिकेशन, आउटलुक साप्ताहिक, अमर उजाला, आज समाज, बीबीसी, ऑल इंडिया रेडियो, सीएनईबी समाचार चैनल, यूएनआई टीवी, लाइव इंडिया और ओपिनियन पोस्ट में अपनी सेवाएँ दी हैं।

राकेश टिकैत का ढोल उनके घर में फट गया

जिन राजनीतिक दलों ने इसमें बढ़-चढ़ कर पीछे से हिस्सा लिया, पैसा दिया, खाने-पीने और आने-जाने का इंतजाम कराया, उन्हें लग रहा है कि यह सारी मेहनत बेकार गयी। यह जो सारा इंतजाम किया गया था, इसका मकसद था उत्तर प्रदेश के चुनाव को प्रभावित करना।

झूठ के सहारे हिंदुओं को असहिष्णु दिखाने की कोशिश

देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की घटनाओं की खबर आती है और उसमें जोड़ दिया जाता है बाद में कि इस कारण से घटना हुई। उस घटना का जय श्रीराम के नारे से कोई संबंध नहीं होता, लेकिन जोड़ा जाता है। कांग्रेस से लेकर तमाम विपक्षी दल इस तरह की राजनीति को बढ़ावा देना चाहते हैं, इस तरह के मुद्दे या विचार को खड़ा करना चाहते हैं। तो षड़यंत्र क्या है? षड़यंत्र दो तरह के हैं।

मुकुल रॉय के जाने से भाजपा के लिए सबक

पश्चिम बंगाल के घटनाक्रम में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मुकुल राय पार्टी छोड़ कर तृणमूल कांग्रेस में वापस चले गये। कांग्रेस से निकले, तृणमूल कांग्रेस बनायी। तृणमूल कांग्रेस से निकले, भारतीय जनता पार्टी में आये। भाजपा से निकले, फिर तृणमूल कांग्रेस में चले गये। तृणमूल कांग्रेस में उनका वापस जाना क्या बताता है तृणमूल कांग्रेस के लिए, भाजपा के लिए और सामान्य तौर पर राजनीति के लिए?
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