अभिरंजन कुमार, पत्रकार :

कुमार विश्वास सैनिकों की बात करते हैं और सैनिक कभी मैदान छोड़कर नहीं भागते। इसिलए अगर उनमें दम है, तो केजरीवाल से इस लड़ाई को वे जीतकर दिखाएं। और अगर दम नहीं है, तो उनका हश्र भी वही होने वाला है, जो इस पार्टी में दूसरे तमाम को-फाउंडर्स का हुआ है।

 वैसे आप लोग अगर मेरी बातों को सही परिप्रेक्ष्य में समझ सकें, तो मैं यह भी कहूंगा कि अगर कुमार विश्वास के पास सचमुच कुछ विधायक हैं, तो उन्हें आम आदमी पार्टी तोड़ देनी चाहिए। जिस व्यक्ति ने आंदोलन के नाम पर देश का भरोसा तोड़ा, उसकी पार्टी तोड़ने में कोई नैतिक प्रश्न मुझे दिखाई नहीं देता।

इतना ही नहीं, अगर कुमार विश्वास पार्टी तोड़ने में कामयाब हो जाएं, तो बीजेपी के समर्थन से उन्हें सरकार बनाने का भी प्रयास करना चाहिए। अगर अरविंद केजरीवाल कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना सकते हैं, तो कुमार विश्वास बीजेपी के समर्थन से सरकार क्यों नहीं बना सकते?

मुझे यह समझ में नहीं आता कि एक तरफ अरविंद केजरीवाल तो अपने दुलरुआ विधायक के मुँह से कुमार विश्वास को बार-बार आरएसएस और बीजेपी का एजेंट कहलवा रहे हैं, दूसरी तरफ कुमार विश्वास डिफेंसिव हो रहे हैं। युद्ध भावुक संदेशों से नहीं, मुकाबला करने से जीते जाते हैं।

कुमार विश्वास को खुलकर कहना चाहिए कि जो नेता स्वयं कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों का एजेंट है, वह किस मुँह से दूसरों पर किसी अन्य पार्टी या संगठन का एजेंट होने का आरोप लगवाता है? क्या यह तथ्य नहीं है कि बच्चों की कसम खाने के बावजूद केजरीवाल ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई?

अगर कुमार विश्वास को राजनीति नहीं करनी थी, तो जैसे केजरीवाल के राजनीतिक दल बनाते ही अन्ना ने उनसे किनारा कर लिया था, वैसे ही उन्हें भी किनारा कर लेना चाहिए था। लेकिन जब वे एक राजनीतिक दल में शामिल हो गये, तो फिर बीच युद्ध में राजनीति से मोहभंग की बात करना पलायन और पराजय है।

अपने वीडियो में आप देश के बहादुर सैनिकों का समर्थन करते हैं, यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन उन बहादुर सैनिकों से कुछ सीखिए कुमार विश्वास जी। सैनिक के लिए जान महत्वपूर्ण नहीं होती। सुख-सुविधाएं भी महत्वपूर्ण नहीं होतीं। उनके लिए तो केवल जीत महत्वपूर्ण होती है। हमारे देश का सैनिक जान की बाजी लगाकर भी जीत हासिल करता है।

कुमार विश्वास जी, क्या आपमें केजरीवाल से यह लड़ाई जीतने का माद्दा है? अगर हाँ, तो अभी आपके पास यह साबित करने का सुनहरा मौका है कि अन्ना आंदोलन में शामिल सारे लोग फर्ज़ी नहीं थे। अभी आप एक सरकार बनाकर उसे अच्छे तरीके से चलाकर देश को दिखा सकते हैं कि किस आदर्श सरकार के लिए आप लोगों ने आंदोलन किया था।

अगर नहीं, तो बेहतर होगा कि घर बैठकर कविताएं लिखिए और मंच पर लोगों का मनोरंजन कीजिए। आम आदमी पार्टी छोड़कर वैसे तो बीजेपी में कतई मत शामिल होइएगा, जैसे शाजिया इल्मी हो गईं। या फिर वैसे कोई कुकुरमुत्ता संगठन भी मत बना लेना कविवर, जैसे योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण ने बना लिया और अप्रासंगिक हो गये।

(देश मंथन, 3 मई 2017)

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