क्या नेहरू ने चीन की मदद की सुरक्षा परिषद का सदस्य बनने में?

राजीव रंजन झा : 

वित्त मंत्री अरुण जेटली के एक बयान से यह विवाद खड़ा हो गया है कि क्या चीन को सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता दिलवाने में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मदद की थी? 

आपको नहीं पता होगा मध्य प्रदेश में भाजपा की हार का यह कारण

राजीव रंजन झा : 

कल शाम रीवा के भँवर सिंह से बात होने लगी। उन्होंने जो सबसे महत्वपूर्ण और दिलचस्प बात बतायी, वह इस टिप्पणी के अंत में है। वे यहाँ दिल्ली में चौकीदार का काम करते हैं। मैंने पूछा, वोट देने गये थे? 

क्यों फिर उल्टा पड़ गया कांग्रेस का दाँव

कांग्रेस अध्यक्षों की सूची 1947 से नहीं, 1978 से देखें...

राजीव रंजन झा : 

शशि थरूर कांग्रेस के नये मणिशंकर अय्यर बन गये हैं। वे अपनी समझ से तो भाजपा पर बहुत धारदार हमला करते हैं, पर भाजपा उनका फेंका हुआ हथगोला लपक कर वापस कांग्रेसी खेमे पर ही उछाल दे रही हैं।

विपक्षी महागठबंधन पर कांग्रेस की दबाव की रणनीति

संदीप त्रिपाठी :

केंद्र की एनडीए सरकार के खिलाफ देशभर में विपक्षी दलों का महागठबंधन बनाने की कल्पना को खुद कांग्रेस खारिज करती दिख रही है। एक तरफ दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर ‘महागठबंधन’ का प्रयास आसान नहीं होगा।

बहुत कुछ कहता है आशुतोष और आशीष का इस्तीफा

संदीप त्रिपाठी

स्वतंत्रता दिवस पर आम आदमी पार्टी (आआपा) से दो स्तंभाकार नेता स्वतंत्र हुए। एक आशुतोष और दूसरे आशीष खेतान। इनमें आशुतोष ने तो उसी दिन खुलासा कर दिया और उनके खुलासा करने पर आआपा सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि इस जन्म में तो आपको छोड़ने की अनुमति नहीं दूँगा। हालाँकि इसका आशुतोष पर कोई असर नहीं पड़ा। आशीष खेतान ने भी 15 अगस्त को ही इस्तीफा ईमेल कर दिया था लेकिन इसका खुलासा उन्होंने बुधवार को किया। क्या इन्हें राजनीति रास नही आयी या कोई और बात है? क्या कहता है आआपा के संस्थापक सदस्यों का एक-एक कर पार्टी छोड़ना।

आशीष के इस्तीफे के सार्वजनिक होने पर आआपा के हाशिये पर पड़े बागी नेता डॉ. कुमार विश्वास ने ट्विटर पर लिखा, ‘हम तो चंद्रगुप्त बनाने निकले थे, हमें क्या पता था कि चंदा गुप्ता बन जायेगा।’ लोकपाल आंदोलन की आधार भूमि पर हिंदुस्तान में राजनीति बदलने के लिए बनी आम आदमी पार्टी  (आआपा) से एक-एक कर संस्थापक नेताओं के बाहर निकलने पर डॉ. विश्वास का यह ट्वीट अत्यंत समीचीन है। इस ट्वीट का अर्थ सीधा है कि आप के गठन के आधार पर लोगों द्वारा संजोया गया सपना खंडित हो चुका है। राजनीति बदलने के लिए राजनीति में आने का दावा करने वाली आआपा अब राजनीति के कीचड़ में पुरानी राजनीतिक पार्टियों से भी ज्यादा सन चुकी है। आशुतोष और आशीष, दोनों के इस्तीफों को राज्यसभा में आआपा की ओर से कारोबारी सुशील गुप्ता और चार्टर्ड एकाउंटेंट एनडी गुप्ता को भेजे जाने से जोड़ा जा रहा है।

लोकसभा चुनाव में क्रमश: चांदनी चौक और नयी दिल्ली से आआपा उम्मीदवार के तौर पर दूसरे नंबर पर रहे यह दोनों नेता राज्यसभा में जाना चाहते थे। वह नहीं हुआ और पार्टी से बिल्कुल बाहर के दो सेठों को अवसर दिया गया। इसके बाद यह दोनों आगामी लोकसभा चुनाव में अपनी पुरानी सीटों से लड़ना चाह रहे थे। लेकिन पार्टी चांदनी चौक से पंकज गुप्ता और नयी दिल्ली से राहुल मेहरा या राघव चड्ढा को लड़ाने पर विचार करने लगी थी। इस विचार में कुल मिलाकर आशुतोष और आशीष ने पार्टी में अपने कद के हिसाब से अपनी तौहीन समझी। पार्टी के भीतर इतने कद्दावर नेता का रसूख रखने वाले अपनी ही पार्टी में अपनी ही सीट से उम्मीदवारी हासिल न कर सकें तो किस बात के कद्दावर नेता?

पार्टी की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये का पहला चंदा देने वाले शांतिभूषण, लोकपाल कानून का मजमून बनाने वाले प्रशांत भूषण, पार्टी की बातों को तार्किक ढंग से और बेहतरीन रूप में मीडिया में रखने वाले योगेंद्र यादव, पार्टी के बुद्धिजीवी चेहरे प्रो. आनंद कुमार, अजीत झा, मयंक गांधी, पार्टी को मोहल्ला सभा की अवधारणा देने वाले वाले विनोद कुमार बिन्नी जैसे नेताओं को बेइज्जत कर पार्टी से निकाले जाते वक्त यही दोनों नेता आशुतोष और आशीष पार्टी के कुकर्मों पर पर्दा डालने का काम बखूबी करते रहे। पार्टी नेतृत्व (यहाँ अरविंद केजरीवाल पढ़े) के तानाशाह होने का आरोप लगाये जाने पर यह दोनों नेता मीडिया में पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की बातें करते नहीं अघाते थे। यहाँ तक पार्टी के सबसे भीड़ खींचू नेता डॉ. कुमार विश्वास की जब पार्टी के भीतर छोटे प्यादों से बेइज्जती करायी जाने लगी, तब भी आदर्शों के ये मूरत खामोश रहे, क्यों?

छह साल में आआपा के भीतर हुई उठापटक के साफ है कि यह पार्टी एक व्यक्ति की पार्टी बन कर रह गयी है और इस पार्टी का लोकतंत्र जैसी अवधारणा में कोई यकीन नहीं है। सीमा पर जवानों के गुणगान से शुरू हुई पार्टी अब इन जवानों के खिलाफ ही राग अलापने वाली पार्टी में तब्दील हो चुकी है। क्रोनी पूँजी की मुखालफत करने वाली पार्टी सेठों को उपकृत करने वाली पार्टी में तब्दील हो चुकी है। छह सालों में यह भी स्पष्ट हो गया है कि इनके कोई आदर्श नहीं थे। आदर्शों का एक हवा महल खड़ा किया गया, एक छद्म रचा गया जिसके आकर्षण में तमाम युवा फँसते चले गये। इन युवाओं के बल पर कुछ आत्मकेंद्रित लोग नेता बन गये और जब पार्टी नेतृत्व के स्वार्थों से इनके निजी स्वार्थ टकराने लगे और अपने निहित स्वार्थ पूरे नहीं हुए और तो एक-एक कर सब अलग होते गये। रह गये हैं वे युवा, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए अपनी नौकरी, अपने करियर को तिलांजलि देकर मैदान में उतरे थे, अपने टूटे सपनों और अंधकारमय भविष्य के साथ।

(देश मंथन, 23 अगस्त 2018)

 

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर : "लालू जिंदा हो गया है। सब बोलते थे कि लालू खत्म हो गया। देखो ...

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर : "एक बार आप माउंट एवरेस्ट पर पहुँच जाते हैं तो उसके बाद उतरने ...

डॉ वेद प्रताप वैदिक, राजनीतिक विश्लेषक : चार राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा की वैसी दुर्गति ...

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक : 'भागवत कथा' के नायक मोदी यूँ ही नहीं बने। क्या ...

उमाशंकर सिंह, एसोसिएट एडिटर, एनडीटीवी प्रधानमंत्री ने आज ही सांसद आदर्श ग्राम योजना की शुरुआत की ...

क़मर वहीद नक़वी, वरिष्ठ पत्रकार : सुना है, सरकार काला धन ढूँढ रही है। उम्मीद रखिए! एक न एक दिन ...

क़मर वहीद नक़वी, वरिष्ठ पत्रकार : तो झाड़ू अब ‘लेटेस्ट’ फैशन है! बड़े-बड़े लोग एक अदना-सी झाड़ू के ...

क़मर वहीद नक़वी, वरिष्ठ पत्रकार : राजनीति से इतिहास बनता है! लेकिन जरूरी नहीं कि इतिहास से राजनीति ...

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक : सोने का पिंजरा बनाने के विकास मॉडल को सलाम .. एक ...

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर : आखिर कौन नहीं चाहता था कि कांग्रेस हारे। सीएजी रिपोर्ट और ...

अभिरंजन कुमार : बनारस में भारत माता के दो सच्चे सपूतों नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के बीच ...

देश मंथन डेस्क यह महज संयोग है या नरेंद्र मोदी और उनकी टीम का सोचा-समझा प्रचार, कहना मुश्किल है। ...

पुण्य प्रसून बाजपेयी, कार्यकारी संपादक, आजतक : 1952 में मौलाना अब्दुल कलाम आजाद को जब नेहरु ने ...

देश मंथन डेस्क : कांग्रेस की डिजिटल टीम ने चुनाव प्रचार के लिए अब ईमेल का सहारा लिया है, हालाँकि ...

दीपक शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार : कांग्रेस, सपा, बसपा, जेडीयू, आप... सभी मुस्लिम वोट बैंक की लड़ाई लड़ ...

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर : बनारस इस चुनाव का मनोरंजन केंद्र बन गया है। बनारस से ऐसा क्या ...

रवीश कुमार, वरिष्ठ टेलीविजन एंकर : जिसने भी बनारस के चुनाव को अपनी आँखों से नहीं देखा उसने इस ...

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : राजा ने सभी दरबारियों को एक-एक बिल्ली और एक-एक गाय दी। सबसे कहा कि ...

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार : मुगल बादशाह औरंगजेब ऐसा शासक रहा है, जिसका इतिहास में ...

विद्युत प्रकाश :  देश भर में सुबह के नास्ते का अलग अलग रिवाज है। जब आप झारखंड के शहरों में ...

संजय सिन्हा, संपादक, आजतक : मैं कभी सोते हुए बच्चे को चुम्मा नहीं लेता। मुझे पता है कि सोते हुए ...

आलोक पुराणिक, व्यंग्यकार : अमेरिका के अखबार वाल स्ट्रीट जनरल ने रॉबर्ट वाड्रा की जमीन की बात की ...

एल्फ्रेड नोबल, पत्रकार : सोसाइटी के एक फ्लैट में शर्मा अंकल, आंटी रहते हैं। पचहत्तर से ज्यादा ...

विद्युत प्रकाश मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार :  रेलवे स्टीमर के अलावा पटना और पहलेजा घाट के बीच लोगों के ...

लोकप्रिय मैसेजिंग सेवा व्हाट्सऐप्प का इस्तेमाल अब पर्सनल कंप्यूटर या लैपटॉप पर भी इंटरनेट के माध्यम ...

सोनी (Sony) ने एक्सपीरिया (Xperia) श्रेणी में नया स्मार्टफोन बाजार में पेश किया है।

लावा (Lava) ने भारतीय बाजार में अपना नया स्मार्टफोन पेश किया है।

      लेनोवो (Lenovo) ने एस सीरीज में नया स्मार्टफोन पेश किया है। 

इंटेक्स (Intex) ने बाजार में नया स्मार्टफोन पेश किया है।

स्पाइस (Spice) ने स्टेलर (Stellar) सीरीज के तहत बाजार में अपना नया स्मार्टफोन पेश किया है।

जोलो ने अपना नया स्मार्टफोन पेश किया है। जोलो क्यू 1011 स्मार्टफोन मं 5 इंच की आईपीएस स्क्रीन लगी ...

एचटीसी ने भारतीय बाजार में दो नये स्मार्टफोन पेश किये हैं। कंपनी ने डिजायर 616 और एचटीसी वन ई8 ...