अभिरंजन कुमार :

बनारस में भारत माता के दो सच्चे सपूतों नरेंद्र मोदी और अरविंद केजरीवाल के बीच होने वाले मुकाबले में 12 मई को जनता को फैसला सुनाना है।

इसलिए आइए, जान लेते हैं कि दोनों नेताओं में मुख्य-मुख्य अंतर क्या हैं :

1. मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे सुयोग्य उम्मीदवार हैं, जबकि केजरीवाल भारत के सभी सर्वोच्च पदों के लिए सबसे सुयोग्य दावेदार हैं, चाहे वह प्रधानमंत्री का पद हो, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का पद हो, भारत के जनलोकपाल का पद हो या फिर सीबीआई प्रमुख का पद ही क्यों न हो।

2. मोदी से बड़ा विकास-पुरुष दुनिया में कोई नहीं है, जबकि केजरीवाल से बड़ा ईमानदार दुनिया में कोई नहीं है।

3. मोदी जहाँ महादेव के समतुल्य हैं, वहीं केजरीवाल धरती पर फरिश्ते के रूप में उतरे हैं।

4. मोदी की पार्टी के 34 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं, इसलिए उनकी पार्टी चोरों की पार्टी है, जबकि केजरीवाल की पार्टी के सिर्फ 16 फीसदी उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले हैं, इसलिए उनकी पार्टी दूध की धुली पार्टी है।

5. मोदी की पार्टी के 74 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं, इसलिए उनकी पार्टी खास लोगों की पार्टी है, जबकि केजरीवाल की पार्टी के सिर्फ 43 फीसदी उम्मीदवार करोड़पति हैं, इसलिए उनकी पार्टी आम लोगों की पार्टी है।

6. मोदी अंबानी-अडानी समेत सारे पूँजीपतियों को खास आदमी समझ कर उनका पूरा ख्याल रखते हैं, जबकि केजरीवाल अंबानी-अडानी को छोड़कर अन्य सभी पूँजीपतियों को आम आदमी समझते हैं और उनसे साथ आने की दरकार रखते हैं।

7. मोदी अगर गैस के दाम कम करवा दें, तो केजरीवाल मोदी के साथ खड़े हो जायेंगे, जबकि केजरीवाल अगर गैस का मुद्दा छोड़ दें, तो भी मोदी उनके साथ खड़े नहीं होंगे।

8. मोदी को भ्रष्ट लोग जम कर चंदा दे रहे हैं, इसलिए भ्रष्टाचार उनके लिए दिखावे का मुद्दा है। केजरीवाल को भ्रष्ट लोग अभी उतना चंदा नहीं दे रहे हैं, इसलिए भ्रष्टाचार उनके लिए भी दिखावे का मुद्दा है।

9. मोदी देश के सबसे अनुभवी और व्यवस्थित तरीके से काम करने वाले तानाशाह हैं, जबकि केजरीवाल देश के सबसे अनुभवहीन और अराजक तरीके से काम करने वाले तानाशाह हैं।

10. मोदी शायद भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं, जबकि केजरीवाल शायद भारत को मध्य-पूर्व बनाना चाहते हैं।

11. मोदी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का सहारा है, जबकि केजरीवाल को फोर्ड फाउंडेशन का सहारा है।

12. मोदी जी "आरएसएस वाली भारत माता" की जय और वंदे मातरम बोलते हैं, जबकि केजरीवाल साहब "एनजीओ वाली भारत माता" की जय और वंदे मातरम बोलते हैं।

13. मोदी विकास के चोले में सांप्रदायिक राजनीति करना चाहते हैं और अगर जरूरत पड़े तो सांप्रदायिकता के चोले में भी सांप्रदायिक राजनीति कर सकते हैं, जबकि केजरीवाल ईमानदारी के चोले में सांप्रदायिक राजनीति करना चाहते हैं और अगर जरूरत पड़े तो धर्मनिरपेक्षता के चोले में भी सांप्रदायिक राजनीति करने को तत्पर रहते हैं।

14. मोदी एक आस्तिक हिंदू हैं और मुसलमानों की टोपी नहीं पहनते, जबकि केजरीवाल ऐसे नास्तिक हैं जो मौके पर हिंदू और मौके पर मुसलमान बनने की कला में माहिर हैं।

15. मोदी को बनारस में हिंदुओं ने वोट नहीं दिया तो हार जायेंगे, जबकि केजरीवाल को बनारस में मुसलमानों ने वोट नहीं दिया तो हार जायेंगे। इसलिए मोदी की नजर विशेष कर हिंदू वोटों पर है, जबकि केजरीवाल की नजर विशेष कर मुस्लिम वोटों पर है।

16. मोदी गुजरात में दंगा में नहा कर पवित्र हो चुके हैं, जबकि केजरीवाल बनारस में गंगा में नहा कर पवित्र हो चुके हैं।

17. मोदी ने वोटरों को चालाकी से चूना लगाने में पीएचडी की है, जबकि केजरीवाल ने मतदाताओं को मासूमियत से मूर्ख बनाने में मास्टरी की है।

18. मोदी अगर एक बार रात को दिन कह दें, तो किसी भी कीमत पर दोबारा उसे रात नहीं कहेंगे, जबकि केजरीवाल अगर एक बार रात को रात भी कह दें, तो दिव्यज्ञान से अगले ही पल उसे दिन घोषित कर सकते हैं।

19. मोदी एक बार कुर्सी पकड़ लें तो कुर्सी छोड़ना उन्होंने नहीं सीखा है। केजरीवाल को कोई जबरदस्ती कुर्सी दे भी दे, तो कुर्सी पर बैठना उन्होंने नहीं सीखा है।

20. नरेंद्र मोदी किसी बात पर माफी माँगने को तैयार नहीं होते, जबकि केजरीवाल बात-बात पर माफी माँगते रहते हैं।

21. मोदी खास आदमी हैं, इसलिए कोई उन्हें छू भी नहीं सकता, जबकि केजरीवाल आम आदमी हैं, इसलिए जब-तब जहाँ-तहाँ थप्पड़ खाते रहते हैं।

22. मोदी सोचते हैं कि हमला करवाना भी होगा तो अपने ऊपर करवायेंगे? केजरीवाल सोचते हैं कि अपने ऊपर हमला करवा लेने से नेता को दूसरों के ऊपर हमला करने का मौका मिल जाता है।

23. मोदी को लगता है कि टिप-टॉप रहकर लोगों को आकर्षित किया जा सकता है, जबकि केजरीवाल को लगता है कि उजड़े-उजड़े रह कर जनता को बेवकूफ बनाया जा सकता है।

24. मोदी अपने चुनाव-चिह्न कमल को पोस्टरों और झंडों पर ही रहने देते हैं, जबकि केजरीवाल अपने चुनाव-चिह्न झाड़ू को डंडे की तरह हाथ में लेकर चलते हैं।

25. मोदी का देश पर एहसान यह है कि देश सेवा के लिए उन्होंने पत्नी को छोड़ दिया, जबकि केजरीवाल का देश पर एहसान यह है कि देश सेवा के लिए उन्होंने इन्कम टैक्स की नौकरी छोड़ दी।

26. मोदी ने चाय वालों को चर्चा दिलायी और कुछ नहीं दिया, जबकि केजरीवाल ने ऑटो वालों को चर्चा दिलायी और कुछ नहीं दिया।

27. मोदी का गुजरात मॉडल उन्हें ज्यादा-से-ज्यादा भारत का प्रधानमंत्री बना सकता है, लेकिन केजरीवाल का दिल्ली मॉडल उन्हें एक दिन अमेरिका का राष्ट्रपति भी बना सकता है।

(देश मंथन, 16 अप्रैल 2014)

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